वासुकिनाथ

बासुकीनाथ एक प्राचीन शिव मंदिर है।

वासुकिनाथ (Basukinath) भारत के झारखंड राज्य के दुमका ज़िले में स्थित एक शहर है।[1][2]

वासुकिनाथ
Basukinath
वासुकिनाथ में मंदिर की दीवार पर बनी शिव की प्रतिमा
वासुकिनाथ में मंदिर की दीवार पर बनी शिव की प्रतिमा
वासुकिनाथ is located in झारखण्ड
वासुकिनाथ
वासुकिनाथ
झारखंड में स्थिति
निर्देशांक: 24°23′N 87°05′E / 24.39°N 87.08°E / 24.39; 87.08निर्देशांक: 24°23′N 87°05′E / 24.39°N 87.08°E / 24.39; 87.08
ज़िलादुमका ज़िला
प्रान्तझारखंड
देश भारत
जनसंख्या (2011)
 • कुल14,119
भाषाएँ
 • प्रचलितहिन्दी
समय मण्डलभामस (यूटीसी+5:30)

विवरण संपादित करें

वासुकिनाथ अपने शिव मन्दिर के लिये जाना जाता है। वैद्यनाथ मन्दिर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक वासुकिनाथ में दर्शन नहीं किये जाते। यह मन्दिर देवघर से 42 किलोमीटर दूर जरमुण्डी गाँव के पास स्थित है। यहाँ पर स्थानीय कला के विभिन्न रूपों को देखा जा सकता है। इसके इतिहास का सम्बन्ध नोनीहाट के घाटवाल से जोड़ा जाता है। वासुकिनाथ मन्दिर परिसर में कई अन्य छोटे-छोटे मन्दिर भी हैं। मंदिर का प्रचीन इतिहास : यह माना जाता है कि वर्तमान दृश्य मंदिर की स्थापना 16वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में हुई। हिंदुओं के कई ग्रंथों में सागर मंथन का वर्णन किया गया है, जब देवताओं और असुरों ने मिलकर सागर मंथन किया था। बासुकीनाथ मंदिर का इतिहास भी सागर मंथन से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि सागर मंथन के दौरान पर्वत को मथने के लिए वासुकी नाग को माध्यम बनाया गया था। इन्हीं वासुकी नाग ने इस स्थान पर भगवान शिव की पूजा अर्चना की थी। यही कारण है कि यहाँ विराजमान भगवान शिव को बासुकीनाथ कहा जाता है।

इसके अलावा मंदिर के विषय में एक स्थानीय मान्यता भी है। कहा जाता है कि यह स्थान कभी एक हरे-भरे वन क्षेत्र से आच्छादित था जिसे दारुक वन कहा जाता था। कुछ समय के बाद यहाँ मनुष्य बस गए जो अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दारुक वन पर निर्भर थे। ये मनुष्य कंदमूल की तलाश में वन क्षेत्र में आया करते थे। इसी क्रम में एक बार बासुकी नाम का एक व्यक्ति भी भोजन की तलाश में जंगल आया। उसने कंदमूल प्राप्त करने के लिए जमीन को खोदना शुरू किया। तभी अचानक एक स्थान से खून बहने लगा। बासुकी घबराकर वहाँ से जाने लगा तब आकाशवाणी हुई और बासुकी को यह आदेशित किया गया कि वह उस स्थान पर भगवान शिव की पूजा अर्चना प्रारंभ करे। बासुकी ने जमीन से प्रकट हुए भगवान शिव के प्रतीक शिवलिंग की पूजा अर्चना प्रारंभ कर दी, तब से यहाँ स्थित भगवान शिव बासुकीनाथ कहलाए।

बासुकीनाथ मंदिर झारखंड के कुछ अतिप्राचीन मंदिरों में से एक है। मंदिर के पास ही एक तालाब स्थित है जिसे वन गंगा या शिवगंगा भी कहा जाता है। इसका जल श्रद्धालुओं के लिए अति पवित्र माना जाता है। मुख्य मंदिर के अलावा परिसर में अन्य हिन्दू देवी-देवताओं की स्थापना भी की गई है।

बाबा बैजनाथ के बाद सर्वाधिक महत्व का बासुकीनाथ मंदिर : देश के कोने-कोने से आने वाले शिव भक्त पहले देवघर स्थित बाबा बैजनाथ धाम पहुँचते हैं और भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करते हैं। हालाँकि, बाबा बैजनाथ के बाद अधिकांश श्रद्धालु बासुकीनाथ ही पहुँचते हैं। मान्यता भी है कि जब तक बासुकीनाथ के दर्शन न किए जाएँ तब तक बाबा बैजनाथ की यात्रा अधूरी ही मानी जाएगी। श्रद्धालु अपने साथ गंगाजल और दूध लेकर बासुकीनाथ पहुँचते हैं और भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।


मंदिर में स्थापित बासुकीनाथ (फोटो : पत्रिका) हिंदुओं में यह मान्यता है कि बाबा बैजनाथ में विराजमान भगवान शिव जहाँ दीवानी मुकदमों की सुनवाई करते हैं वहीं बैजनाथ धाम से लगभग 45 किमी दूर स्थित बासुकीनाथ में विराजित भोलेनाथ श्रद्धालुओं की फौजदारी फ़रियाद सुनते हैं और उनका निराकरण करते हैं। बासुकीनाथ में भगवान शिव का स्वरूप नागेश का है। यही कारण है कि यहाँ भगवान शिव को दूध अर्पित करने वाले भक्तों को भगवान शिव का भरपूर आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कैसे पहुँचे? बासुकीनाथ पहुँचने के लिए निकटतम हवाईअड्डा राँची का बिरसा मुंडा एयरपोर्ट है जो मंदिर से लगभग 280-300 किमी की दूरी पर है। इसके अलावा कोलकाता का नेताजी सुभास चंद्र बोस हवाईअड्डा भी यहाँ से लगभग 320 किमी की दूरी पर है। बासुकीनाथ से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन बासुकीनाथ रेलवे स्टेशन है जो लगभग 5 किमी है, उसके बाद दुमका है जो 25 किमी है और बासुकीनाथ से जसीडीह रेलवे स्टेशन की दूरी लगभग 50 किमी है। बासुकीनाथ, दुमका-देवघर राज्य राजमार्ग पर स्थित है। झारखंड के कई शहरों से बासुकीनाथ पहुँचने के लिए बस की सुविधा उपलब्ध है। बासुकीनाथ, राँची से लगभग 294 किमी और धनबाद से लगभग 130 किमी की दूरी पर स्थित है।

इन्हें भी देखें संपादित करें

सन्दर्भ संपादित करें

  1. "Tourism and Its Prospects in Bihar and Jharkhand Archived 2013-04-11 at the वेबैक मशीन," Kamal Shankar Srivastava, Sangeeta Prakashan, 2003
  2. "The district gazetteer of Jharkhand," SC Bhatt, Gyan Publishing House, 2002

3. About Basukinath Dham: Nurturing Spiritual Souls Since Time Immemorial.