साँचा:मुखपृष्ठ प्रमुख चित्र

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भारत के इतिहास में गोनन्द नाम के तीन राजा हुए जो प्राचीन काश्मीर के शासक थे। उन्हीं के लिये इस नाम का विशेष प्रयोग हुआ और कल्हण ने अपने काश्मीर के इतिहास राजतरंगिणी में उनका यथास्थान काफी वर्णन किया है। उनके राज्य में स्थित शंकराचार्य पर्वत के शंकराचार्य मंदिर से डल झील और श्रीनगर के शहर के दृश्य।
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प्रयोग

यह साँचा मुखपृष्ठ पर प्रमुख चित्र लगाने के लिये उपयोग किया जाता है। यह एक प्राचल स्वीकार करता है। यदि पहला प्राचल भूतपूर्व दिया जाए तो यह पिछला प्रमुख चित्र दिखाता है।

प्रमुख चित्र के साँचे के नाम के रूप

प्रमुख चित्र के साँचे के नाम के रूप ३ प्रकार के हैं। वरीयता के अनुसार इनका नाम निम्न है:

  1. साँचा:प्रमुख चित्र २३ मार्च २००९
  2. साँचा:प्रमुख चित्र सप्ताह १३ वर्ष २००९
  3. साँचा:प्रमुख चित्र मार्च २००९
  • पहला सांचा इसलिए, कि कोई खास अवसर का चित्र किसी एक दिन के लिए लग पाए।
  • दूसरा सांचा साप्ताहिक तौर पर चित्र बदला जाए, इसलिए।
  • तीसरा सांचा, इसलिए कि महीने का एक चित्र स्थायी तौर पर हो, जो कि किसी भी अभाव में कमी को ढंक ले।

आम तौर पर दूसरा सांचा ही दिखेगा, किंतु खास अवसरों के लिए पहला सांचा, उसे ओवर राइड कर देगा, उस दिन के लिए। फिर दूसरे दिन , वही २ नं वाला चलेगा। यदि किसी काराण से सप्ताहांत में नया चित्र ना भी लग पाए, तो स्थान खाली ना दिखे, इसलिए तीसरा सांचा है।