वित्त अधिनियम (Finance Act) भारत का महत्वपूर्ण अधिनियम है। इस अधिनियम के द्वारा भारत सरकार प्रत्येक वित्त वर्ष के आरम्भ में वित्तीय प्रस्ताव रखती है। यह अधिनियम भारत के सभी राज्यों एवं केन्द्र शाशित प्रदेशों पर भी लागू होता है।

प्रत्येक वर्ष वित्तमन्त्री द्वारा संसद में आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाता है। भाग A में सरकार के वित्तीय क्षेत्र में प्रस्तावित नीतियों को दर्शाया जाता है। भाग B में प्रस्तावित कर बजट का वर्णन रहता है। इसे लागू करने के लिए संसद में वित्त विधेयक प्रस्तुत किया जाता है। जब इसे संसद से स्वीकृति मिल जाती है और राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हो जाती है तब यह 'वित्त अधिनियम' बन जाता है।

वित्त अधिनियम की प्रथम अनुसूची में चार भाग होते हैं जिनमें दरें निर्दिष्ट होती हैं :

  • भाग 1 - में चालू निर्धारण वर्ष में लागू कर की दरें निर्दिष्ट होती है।
  • भाग 2 - में चालू वित्त वर्ष में लागू TDS की दरें निर्दिष्ट होती हैं।
  • भाग 3 - में वेतन शीर्षक की आय से आयकर की कटौती की गणना एवं अग्रिम कर गणना की दरें उपलब्ध होती हैं।
  • भाग 4 - में शुद्ध कृषि आय की गणना सम्बन्धी नियम उपलब्ध होते हैं।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें