विद्यालय

संस्थान शिक्षकों की दिशा में छात्रों को पढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है
सूडान के एक ग्रामीण विद्यालय का दृष्य

विद्यालय वह स्थान है, जहाँ शिक्षा ग्रहण की जाती है। "विद्यालय एक ऐसी संस्था है, जहाँ बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं नैतिक गुणों का विकास होता है। ' विद्यालय' शब्द के लिए आंग्ल भाषा में 'स्कूल' शब्द का प्रयोग होता है, जिसकी उत्पत्ति ग्रीक शब्द 'Skohla' या 'Skhole' से हुई है, जिससे तात्पर्य है- 'अवकाश'। यह अर्थ कुछ विचित्र - सा लगता है। परंतु वास्तविकता यह है कि प्राचीन यूनान में अवकाश के स्थलों को ही विद्यालय के नाम से संबोधित किया जाता था। अवकाश काल को ही 'आत्म -विकास' समझा जाता था। जिसका अभ्यास अवकाश नाम निश्चित स्थान पर किया जाता था। धीरे-धीरे यह अवकाश स्थल एक निश्चित उद्देश्य तथा पाठ्यक्रम का ज्ञान प्रदान करने वाली संस्थाएं अर्थात स्कूल बन गए। भारत में कई स्कूल हैं। देश के स्कूलों की एक छोटी सी सूची यहां लिखी है

इतिहाससंपादित करें

प्राचीन भारत में विद्यालय गुरुकुल के रूप में होते थें। ये अक्सर गुरु के घर या किसी मठ में होते थें। मुग़लों के ज़माने में, बच्चों को शिक्षित करने के लिये 'मदरसों' का आरम्भ किया गया था। अंग्रेज़ी दस्तावेज़ों के अनुसार, १८वीं सदी में देश में विद्यालय सामान्य थें। पूरे देश में मंदिर, मस्जिद और गांव में एक विद्यालय का होना सामान्य था। इनमें पढ़ना, लिखना, धर्मशास्त्र, क़ानून, खगोल/एस्ट्रोनॉमी, आचार-विचार, जीव, चिकित्सा विज्ञान और धर्म के बारे में सिखाया जाता था।

ब्रिटिश साम्राज्य में इंग्लैंङ, अमरीका और भिन्न देशों से क्रिश्चियन मिशनरियों ने, मिशनरी और आवासीय विद्यालय खोले थें। जैसे ये प्रसिद्ध हुए, तो कुछ विद्यालय खोले गए, और कुछ विद्यालयों को सम्मान भी मिला। आज ज़्दायातर विद्यालयों में पढ़ाई-लिखाई के दौरान अनुशासन और पट्यक्रमों में अंग्रेज़ी नियमों का पालन किया जाता है। आज भारत में कई शिक्षा बोर्ङ/मंङल हैं। उदाहरण स्वरूप: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, सी.आइ.सी.एस.सी व अन्य स्टेट/राज्य के बोर्ङ आदि। आजकल सामान्य रूप से भाषा, गणित, विज्ञान, भौतिकी/फिज़िक्स, रसायनी/केमिस्ट्री, जीव विज्ञान, भूगोल/जियोग्राफी, इतिहास, सामान्य ज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान सिखाए जाते हैं। इसके अलावा स्कूलों में खेल कूद, गाना, चित्रकारी व नाटक भी होते हैं।

मध्यअह्न भोजन योजनासंपादित करें

विद्यालय
चित्र:Mid-day meal scheme logo.jpg
 
नागालैंङ के वोखा जिले मे बच्छों को भोजन दिया जा रहा है।
प्रकार Government of India
देश भारत
शुरू 1995
वर्तमान स्थिति जारी
वेबसाइट http://mdm.nic.in/

भारत सरकार ने, बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए, मिड डे मील भोजन जैसी योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत कई सरकारी/सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालयों मे बच्चों को दोपहर का भोजन मुफ़्त में दिया जाता है। जिससे 1,265,000 से अधिक स्कूलों में 120,000,000 बच्चों की सेवा की जा रही है। दुनिया में बच्चों की सहायता के लिए चलाई जा रही यह योजना सबसे बड़ी है। इस योजना का शुभारंभ १९९५ में शुरू किया गया था, और तब से इसमें कई परिवर्तन किए गए हैं।

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें