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8 मई 2021

  • 16:2016:20, 8 मई 2021 अन्तर इतिहास +2,678 छो चित्तौड़गढ़ दुर्गचित्तौड़गढ़ दुर्ग का इतिहास:- चित्तौड़गढ़ दुर्ग में तीन साकै1303, 1534, 1567-68 में हुए हैं । जयमल की हवेली चित्तौड़गढ़ दुर्ग में है इस हवेली का निर्माण महाराजा उदयसिंह के काल में हुआ । चित्तौड़गढ़ दुर्ग के प्रथम दरवाजे का नाम पाण्डुपोल, दूसरा द्वार भैरवपोल, तीसरा द्वार गणेशपोल चौथा द्वार लक्ष्मणपोल, पाँचवा द्वार जोड़न पोल, छठा द्वार त्रिपोलिया तथा सातवां द्वार रामपोल है । भैरव पोल के पास ही वीर कल्ला राठौड़ की छतरी स्थित है इस दुर्ग में विष्णु के वराह अवतार का कुम्भश्याम मंदिर है इसका न... टैग: Reverted यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
  • 15:4315:43, 8 मई 2021 अन्तर इतिहास +1,927 छो लोहागढ़ दुर्गविवरण:- लोहागढ़ क़िला' राजस्थान के प्रसिद्ध ऐतिहासिक तथा पर्यटन स्थलों में से एक है। यह क़िला अपनी मज़बूती के कारण            इस दुर्गा को कोई जीत ना सका इसलिए इतिहास में यह अजय रहा है। राज्य राजस्थान ज़िला भरतपुर निर्माता जाट राजा सूरजमल निर्माण काल मध्य काल प्रसिद्धि ऐतिहासिक स्थल कैसे पहुँचें जयपुर, आगरा और दिल्ली से बस या कार द्वार सुलभता से लोहागढ़ पहुंचा जा सकता है। संबंधित लेख राजस्थान, राजस्थान का इतिहास, भरतपुर, भारत के दुर्ग नामकरण लोहे जैसी मज़बूती के कारण ही इस दुर्ग को 'लोह टैग: Reverted यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
  • 05:4805:48, 8 मई 2021 अन्तर इतिहास +276 छो तारागढ़ का दुर्गपरिचय 'तारागढ़ दुर्ग' राजस्थान के दर्शनीय स्थल में से एक है, जो की अजमेर जिले में स्थित है। राजस्थान के गिरी दुर्गों में अजमेर के तारागढ़ दुर्ग को भी शामिल किया गया है । राज्य राजस्थान ज़िला अजमेर ज़िला निर्माण करवाया अजय पाल चौहान ने निर्माण कब हुआ 11वीं सदी में अजमेर जिले में दर्शनीय , पर्यटन स्थल, अजमेर जिला, शाहजहाँ, फल, नीम, मुग़ल काल, ढाई दिन के झौंपडे इत्यादि दर्शनीय स्थल है । इस जानकारी के अनुसार तारागढ़ क़िले को अजेय गिरी दुर्ग बताया गया है लोक संगीत में इस क़िले को गढबीरली भी कह टैग: यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
  • 04:1704:17, 8 मई 2021 अन्तर इतिहास +2,546 जीण माताजीण माता और औरंगज़ेब चमत्कार की कहानी प्राचीन समय में देवी जीण माता ने सबसे बड़ा चमत्कार मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब को दिखाया था। कि जब दिल्ली का बादशाह औरंगज़ेब ने शेखावाटी के मंदिरों को तोड़ने के लिए एक विशाल सेना भेजी थी। यह सेना हर्ष पर्वत पर शिव और हर्षनाथ भैरव का मंदिर खंडित कर जीण माता के मंदिर को खंडित करने आगे बढ़ी। उस समय हर्ष के मंदिर की पूजा गूजर लोग तथा जीणमाता के मंदिर की पूजा तिगाला जाट करते थे। उस समय बादशाह औरंगजेब की सेना ने जीण माता के मंदिर पर हमला किया लेकिन हमले के तुरन्त बाद ज टैग: Reverted यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
  • 04:0304:03, 8 मई 2021 अन्तर इतिहास +72 छो अजमेरअजमेर कि कला एवं संस्कृति:-अजमेर अजमेर टैग: Reverted यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन

7 मई 2021

  • 17:5717:57, 7 मई 2021 अन्तर इतिहास +204 छो जोधपुर जिलाजोधपुर की भौगोलिक स्थिति:-उत्तर-पश्चिमी भारत में स्थित। 23°3′ उत्तरी अंक्षाश से 30°12′ उत्तरी अंक्षाश (अक्षांशीय विस्तार 7°9′) एवं 69°30′ पूर्वी देशान्तर से 78°17′ पूर्वी देशान्तर के मध्य (देशान्तरीय विस्तार 8°47′ )। राजस्थान का अधिकांश भाग उपोष्ण कटिबंध में स्थित है। अक्षांश रेखाएँ- ग्लोब को 180° अक्षांशों में बांटा गया है। 0° से 90° उत्तरी अक्षांश, उत्तरी गोलार्द्ध तथा 0° से 90° दक्षिणी अक्षांश, दक्षिणी गोलार्द्ध कहलाते हैं। अक्षांश रेखायें ग्लोब पर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखायें हैं। टैग: यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
  • 17:3817:38, 7 मई 2021 अन्तर इतिहास +212 छो अजमेरअजमेर कि कला एवं संस्कृति:-अजमेर में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई एवं जैन धर्म के निवासी सभी त्यौहारों को सौहार्द पूर्वक मनाते हैं । लोकदेवता “तेजाजी” धाम, सुरसुरा एक प्रमुख लोकदेवता है| घूमर एवं चरी प्रमुख नृत्य हैं । टैग: Reverted यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
  • 16:1016:10, 7 मई 2021 अन्तर इतिहास +1,688 छो बौद्ध धर्मबौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और दर्शन है। इसके संस्थापक भगवान बुद्ध, शाक्यमुनि (गौतम बुद्ध) थे। बुद्ध राजा शुद्धोदन के पुत्र थे और इनका जन्म लुंबिनी नामक ग्राम (नेपाल) में हुआ था। वे छठवीं से पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व तक जीवित थे। उनके गुज़रने के बाद अगली पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फ़ैला, और अगले दो हज़ार सालों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फ़ैल गया। आज, बौद्ध धर्म में तीन मुख्य सम्प्रदाय हैं: थेरवाद, महायान और वज्रयान। टैग: Reverted यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
  • 16:0316:03, 7 मई 2021 अन्तर इतिहास +1,099 छो बद्रीनाथ मन्दिरलोककथा के अनुसार बद्रीनाथ मंदिर की स्थापना :- पौराणिक कथा के अनुसार यह स्थान भगवान शिव भूमि( केदार भूमि ) के रूप में व्यवस्थित था | भगवान विष्णु अपने ध्यानयोग के लिए एक स्थान खोज रहे थे और उन्हें अलकनंदा के पास शिवभूमि का स्थान बहुत भा गया | उन्होंने वर्तमान चरणपादुका स्थल पर (नीलकंठ पर्वत के पास) ऋषि गंगा और अलकनंदा नदी के संगम के पास बालक रूप धारण किया और रोने लगे टैग: Reverted यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
  • 15:2915:29, 7 मई 2021 अन्तर इतिहास +227 छो जीण माताराजपूत परिवार में हुआ था जीणमाता का जन्म: टैग: Reverted यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
  • 07:2107:21, 7 मई 2021 अन्तर इतिहास +1,351 छो तेजाजीतेजादशमी के पर्व की शुरुआत कैसे हुई : - लोकदेवता वीर तेजाजी का जन्म नागौर जिले में खड़नाल गांव में ताहरजी (थिरराज) और रामकुंवरी के घर माघ शुक्ल, चौदस संवत 1130 यथा 29 जनवरी 1074 को जाट परिवार में हुआ था। उनके पिता गांव के मुखिया थे। वे बचपन से ही वीर, साहसी एवं अवतारी पुरुष थे। बचपन में ही उनके साहसिक कारनामों से लोग आश्चर्यचकित रह जाते थे। बड़े होने पर राजकुमार तेजा की शादी सुंदर गौरी से हुई। टैग: Reverted यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
  • 06:5506:55, 7 मई 2021 अन्तर इतिहास +1,420 छो परशुरामपरशुराम जी का परिचय परिचय – परशुराम जी शिव के परम् भक्त थे परशुराम जी ने पुरी पृथ्वी से क्षत्रियो को समाप्त कर दिया था परशुराम जी का जन्म -त्रेता युग नाम – रामभद्र, भार्गव परशुराम पिता – जमदग्नि माता- रेणुका गुरु – शिक्षा- विश्वामित्र और महर्षि ऋचीक वंश- भृगुवंश जन्म स्तान – इंदौर के पास ही मुंडी गांव में स्थित रेणुका पर्वत पर परशुराम जी का जन्म हुआ था ! और माना जाता है की परशुराम जी अमर है ! टैग: Reverted यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
  • 06:4106:41, 7 मई 2021 अन्तर इतिहास +2,169 छो रामदेव पीररामासापीर बाबा का पहला पर्चा भैरव राक्षस : भैरव नाम के एक राक्षस ने पोकरण में आतंक मचा रखा था। प्रसिद्ध इतिहासकार मुंहता नैनसी के 'मारवाड़ रा परगना री विगत' नामक ग्रंथ में इस घटना का उल्लेख मिलता है। भैरव राक्षस का आतंक पोखरण क्षेत्र में 36 कोष तक फैला हुआ था। यह राक्षस मानव की सुगं सूंघकर उसका वध कर देता था। बाबा के गुरु बालीनाथजी के तप से यह राक्षस डरता था, किंतु फिर भी इसने इस क्षेत्र को जीवरहित कर दिया था। अंत में बाबा रामदेवजी बालीनाथजी के धूणे में गुदड़ी में छुपकर बैठ गए। जब भैरव राक्षस टैग: Reverted यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन