"कात्यायन (वररुचि)" के अवतरणों में अंतर

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{{वार्ता शीर्षक}}वररुचि '''कात्यायन''', [[पाणिनि|पाणिनीय]] सूत्रों के प्रसिद्ध वार्तिककार हैं। वे नौ [[शुल्ब सूत्र|शुल्ब सूत्रों]] में से एक के रचयिता भी हैं ।
 
पुरुषोत्तमदेव ने अपने त्रिकांडशेष अभिधानकोश में कात्यायन के ये नाम लिखे हैं - कात्य, पुनर्वसु, मेधाजित् और वररुचि। "कात्य" नाम गोत्रप्रत्यांत है, महाभाष्य में उसका उल्लेख है। पुनर्वसु नाम नक्षत्र संबंधी है, "भाषावृत्ति" में पुनर्वसु को वररुचि का पर्याय कहा गया है। मेधाजित् का कहीं अन्यत्र उल्लेख नहीं मिलता। इसके अतिरिक्त, [[कथासरित्सागर]] और बृहत्कथामंजरी में कात्यायन वररुचि का एक नाम "श्रुतधर" भी आया है। हेमचंद्र एवं मेदिनी कोशों में भी कात्यायन के "वररुचि" नाम का उल्लेख है।
 
==इन्हें भी देखें==
* [[कात्यायन (विश्वामित्रवंशीय) ]] - जिन्होंने श्रोत, गृह्य और प्रतिहार सूत्रों की रचना की।
* [[अन्य कात्यायन]]
* [[कात्यायन (गोमिलपुत्र)]] - जिन्होंने छंदोपरिशिष्टकर्मप्रदीप की रचना की।
 
[[श्रेणी:संस्कृत आचार्य]]
5,01,128

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