"दासप्रथा (पाश्चात्य)" के अवतरणों में अंतर

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{{वार्ता शीर्षक}}मानव समाज में जितनी भी संस्थाओं का अस्तित्व रहा है उनमें सबसे भयावह '''दासता की प्रथा''' है। मनुष्य के हाथों मनुष्य का बड़े पैमाने पर उत्पीड़न इस प्रथा के अंर्तगत हुआ है। दासप्रथा को संस्थात्मक शोषण की पराकाष्ठा कहा जा सकता है। [[एशिया]], [[यूरोप]], [[अफ्रीका]], [[अमरीका]] आदि सभी भूखंडों में उदय हानेवाली सभ्यताओं के इतिहास में दासता ने सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक व्यवस्थाओं के निर्माण एवं परिचालन में महत्वपूर्ण योगदान किया है। जो सभ्यताएँ प्रधानतया तलवार के बल पर बनी, बढ़ीं और टिकी थीं, उनमें दासता नग्न रूप में पाई जाती थी।
 
[[पश्चिमी सभ्यता]] के विकास के इतिहास में दासप्रथा ने विशिष्ट भूमिका अदा की है। किसी अन्य सभ्यता के विकास में दासों ने संभवत: न तो इतना बड़ा योग दिया है और न अन्यत्र दासता के नाम पर मनुष्य द्वारा मनुष्य का इतना व्यापक शोषण तथा उत्पीड़न ही हुआ है। पाश्चात्य सभ्यता के सभी युगों में - यूनानी, रोमन, मध्यकालीन तथा आधुनिक- दासों ने सभ्यता की भव्य इमारत को अपने पसीने और रक्त से उठाया है।
* [http://www.marial.emory.edu/exhibitions/dream/intro.html Emory and Oxford College]
* [http://www.princeton.edu/mudd/news/faq/topics/slavery.shtml Slavery at Princeton]
* [http://www.lib.unc.edu/mss/exhibits/slavery/ University of North Carolina, Chapel Hill exhibit]
* [http://www.yaleslavery.org/ Yale, Slavery and Abolition]
* [http://www.digitalhistory.uh.edu/historyonline/slav_fact.cfm Slavery Fact Sheets, Digital History]
* [http://www.pdavis.nl/Background.htm#WAS The West African Squadron and slave trade]
* [http://fax.libs.uga.edu/HT857xA1/ British documents on slave holding and the slave trade, 1788-1793] ([[DjVu]]) and {{PDFlink|[http://fax.libs.uga.edu/HT857xA1/1f/ layered PDF]}} (a searchable facsimile at the University of Georgia Libraries)
5,01,128

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