"अंग्रेजी शब्दकोशों का इतिहास" के अवतरणों में अंतर

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(उत्तम लेख)
{{वार्ता शीर्षक}}'[[लैटिन भाषा|लातिन]]' की शब्दसूचियों ने आधुनिक कोश-रचना-पद्धति का जिस प्रकार विकास किया, अंग्रेज कोशों के विकास क्रम में उसे देखा जा सकता है । आरंभ में इन शब्दार्थसूचियों का प्रधान विधान था क्लिष्ट 'लातिन' शब्दों का सरल 'लातिन' भाषा में अर्थ सूचित करना । धीरे-धीरे सुविधा के लिये रोमन भूमि से दूरस्थ पाठक अपनी भाषा में भी उन शब्दों का अर्थ लिख देते थे । 'ग्लाँसरी', और 'वोकैब्युलेरि' के अंग्रेजी भाषी विद्वानों की प्रवृत्ति में भी यह नई भावना जगी । इस नवचेतना के परिणामस्वरूप 'लातिन' शब्दों का अंग्रेजी में अर्थनिर्देश करने की प्रवृत्ति बढ़ने लगी । इस क्रम में '''लैटिन-अंगेजी कोश''' का आरंभिक रूप सामने आया ।
 
दसवीं शताब्दी में ही '[[आक्सफोर्ड]]' के निकटवर्ती स्थान के एक विद्वान धर्मपीठाधीश 'एफ्रिक' ने 'लैटिन' व्याकरण का एक ग्रंथ बनाया था । और उसी के साथ वर्गीकृत 'लातिन' शब्दों का एक 'लैटिन-इंग्लिश', लघुकोश भी जोड दिया था । संभवत: उक्त ढंग के कोशों में यह प्रथम था । १०६६ ई० से लेकर १४०० ई० के बीच की कोशोत्मक शब्दसूचियों को एकत्र करते हुए 'राइट ब्यूलर' ने ऐसी दो शब्दसूचिय़ाँ उपस्थित की है । इनमें भी एक १२ वीं शताब्दी की है । वह पूर्ववर्ती शब्दसूचियों की प्रतिलिपि मात्र हैं । दूसरी शब्दसूची में 'लातिन' तथा अन्य भाषाओं के शब्द हैं ।
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