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==बैंक राष्ट्रीयकरण के बाद==
राष्ट्रीयकरण के बाद उनकी शाखाओं के विस्तार के साथ ही उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों में आश्चर्यकारक प्रगति हुई है। ये सभी राष्ट्रीयकृत बैंक देश के सामाजिक तथा आर्थिक विकास कार्यों की समुचित प्रगति हेतु कटिबद्ध हैं तथा सरकार की नीति के अनुसार कमजोर वर्ग एवं पिछड़ी जाति-जनजाति के लोगों को आर्थिक सहायता द्वारा उसके निम्न स्तर के ऊपर उनके राष्ट्रीय कार्य में सरकार की पूरी तौर पर सहायता कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की ओर बैंकों ने विशेष ध्यान दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों की क्रय शक्ति में वृद्धि करने के लिए बैंकों ने इन क्षेत्रों में अधिक से अधिक पूंजी नियोजन किया है। ग्रामीण तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की स्थापना से तो ग्रामीण विकास तथा उन्नति की अनेक नई दिशाएं उन्नत हुई हैं। समाज के लगभग सभी वर्गों के लोगों तक बैंकिंग सेवा तथा सुविधाएं पहुंच गई हैं और उनका लाभ सभी को समान रूप से मिल रहा है। स्वरोजगार की नई योजना चलाए जाने के कारण शिक्षित बेरोजगारी की समस्या का हल क्रमश: होता जा रहा है। कुटीर उद्योग तथा लघु स्तरीय उद्योगों में काफी बढ़ोतरी हुई है और साथ में निर्यात -आयात को भी बढ़ावा मिल रहा है। श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा सूत्रपात किए गए नए बीस सूत्री आर्थिक कार्यक्रम ने तो देश की सामाजिक तथा आर्थिक प्रगति का एक नया अध्याय खोल दिया है। बीस सूत्री आर्थिक कार्यक्रम ने छोटे किसान, भूमिहीन खेतीहर मजदूर, शिक्षित बेरोजगार, आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग, अनुसूचित जाति व जनजाति, शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्ति, छोटे कारीगर जैसे अनेक कमजोर वर्गों के लोगों के जीवन में विकास तथा खुशहाली का नया सूत्रपात किया। इस प्रकार बैंकों के राष्ट्रीयकरण से देश की आर्थिक व सामाजिक प्रगति का एक नया पर्व शुरू हुआ है।
 
==इन्हें भी देखें==
*[[भारत का आर्थिक इतिहास]]
*[[भारत में बैंकिंग]]
 
==बाहरी कड़ियाँ==