"स्वास्थ्य विज्ञान" के अवतरणों में अंतर

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प्रत्येक मनुष्य प्राप्त धन से संतोष न कर उससे अधिक उपार्जन करने की निरंतर चेष्टा करता है उसी प्रकार प्रस्फुटित (radiant) स्वास्थ्य लाभ के लिए निरंतर प्रयास द्वारा उत्तरोत्तर वृद्धि पूर्ण धनात्मक (positive) स्वास्थ्य प्राप्त करना चाहिए। सर्वांगपूर्ण स्वास्थ्य के लिए शारीरिक और मानसिक स्वस्थ्यता के साथ साथ प्रत्येक व्यक्ति को समाज में सम्मानित पद भी प्राप्त करना आवश्यक है। समाज द्वारा समादृत स्वस्थ पुरुष अपने समाजसेवी कत्र्तव्यों द्वारा ही समाज का उपयोगी अंग बन सकता है। समाज में हीन पद पानेवाला व्यक्ति स्वस्थ नहीं गिना जा सकता है।
 
लोक-स्वास्थ्य-सुधार का इतिहास तीन कालों में बँटा हुआ हैं : पहला परिशोधी काल जिसमें जल, वायु, भोजन, शरीर, वस्त्र आदि की स्वच्छता का ध्यान दिया जाता था। दूसरा कीटाणु शास्त्रसंबंधी ज्ञान का काल जिसमें संक्रामक रोगों का वैज्ञानिक ज्ञान प्राप्त कर उनसे बचने की चेष्टा की गई और तीसरा धनात्मक स्वास्थ्य का वर्तमान काल जिसमें शारीरिक, मानसिक और सामाजिक हृष्टपुष्टतायुक्त सर्वांगपूर्ण समस्त जनता का स्वास्थ्य उत्तरोत्तर संवर्धन किया जाता है।
 
[[श्रेणी:स्वास्थ्य]]
[[श्रेणी:उत्तम लेख]]
 
[[ar:علوم الصحة]]
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