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==संस्कृति==
उत्तर अफ़्रीका की संस्कृति चार मुख्य धाराओं के तालमेल से बनी है -
*पूर्वी भाग में मिस्र की प्राचीन सभ्यता [[नील नदी]] और उसके पास के क्षेत्रों में हज़ारों वर्षों तक चरम पर रही है। मिस्र के कोप्ती ईसाई (जिन्हें अंग्रेजी में कॉप्टिक क्रिश्चन कहते हैं) समुदाय पर इस प्राचीन मिस्री सभ्यता की गहरी छाप देखी जा सकती है।
*दूसरी धारा पश्चिमी भाग की [[बर्बर]] जातियाँ और [[बर्बरी भाषाओँ]] को लेकर बनी है, जो इस भाग का प्राचीन विरसा है। नील नदी से कुछ पश्चिम में मिस्र के ही सिवा नख़लिस्तान (ओएसिस) से बर्बर प्रभाव दिखने लगता है और यह पश्चिम में [[अंध महासागर]] तक फैला हुआ है।
*तीसरी धारा अरबी संस्कृति की है। अरबों ने [[इस्लामी]] दौर की शुरुआत के बाद उत्तर अफ़्रीका पर आक्रमण करके उसको अरब संस्कृति के साथ जोड़ लिया था। सदियों के बीतने से मिस्र की प्राचीन भाषा लगभग ख़त्म हो गयी और वह लोग अरबी बोलने लगे। बर्बर इलाक़ों पर भी अरबी प्रभाव इतना पड़ा के इन समाजों में बर्बरी की तुलना में अरबी बोलने वाले अधिक हो गए और अधिकाँश बर्बरी मूल के लोग अपने-आप को अरब समाज का हिस्सा समझने लगे।
*चौथी धारा यूरोपियाई [[सामवाद]] की है, जिसमें उत्तर अफ़्रीका में मिस्र पर [[इंग्लैण्ड]], लीबिया पर [[इटली]] और बाक़ी हिस्सों पर [[फ्रांस]] को बुलंदी मिली। समय के साथ-साथ इटली का प्रभाव तो जाता रहा है, लेकिन [[फ़्रांसिसी भाषा]] और कई तौर-तरीक़े अभी भी उत्तर अफ़्रीका के "मग़रिब" क्षेत्र में देखे जा सकते हैं।
20वी में बहुत से बर्बर मूल के लोगों में अपनी प्राचीन संस्कृति के लिए जागृति पैदा हुई। कुछ लोग सामाजिक, कला और सरकारी जीवन में बर्बरी भाषाओँ को मान्यता मिलने के लिए आन्दोलन चलाने लगे। इसके विपरीत कुछ अन्य लोगों को लगा के इस से अरब एकता को धक्का लगता है और वे इसका विरोध करने लगे। यह विवाद जारी है, हालांकि मोरक्को, अल्जीरिया और अन्य देशों में बर्बरी भाषाओँ की मान्यता धीरे-धीरे बढ़ती गयी है।
 
==इन्हें भी देखें==