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सतगुरु गोबिंद सिंह
(सतगुरु गोबिंद सिंह)
{{सन्दूक सिख धर्म}}
'''खालसा पंथ''' की स्थापना [[सतगुरसतगुरु गोबिंद सिंह]] जी ने १६९९ को [[बैसाखी]] वाले दिन [[आनंदपुर साहिब]] में की | इस दिन सतगुर ने [[खालसा]] फ़ौज का निर्माण किया | यह फ़ौज सिर्फ सिख ही नहीं , बल्कि दुनिया में किसी पर भी कोई भी अत्याचार हो रहा है वहां लोगों को अत्याचारों से मुक्त करेगी | यही नहीं जहाँ पर गुरमत का परचार नहीं होने दिया जा रहा और हमला हो रहा है वहां पर अपना बचाव करेगी और जुल्मो को मौत के घात उतारेगी |
 
सतगुर गोबिंद सिंह ने खालसा महिमा में खालसा को "काल पुरख की फ़ौज" पद से निवाजा है | [[तलवार]] और [[केसकी]] तो पहले ही सिखों के पास थे, सतगुर गोबिंद सिंह ने "खंडे बाटे की पाहुल" तयार कर [[कछा]], [[कड़ा]] और [[कंघा]] भी दिया | इसी दिन खालसे के नाम के पीछे "[[सिंह]]" लग गया | शारीरिक देख में खालसे की भिन्ता नजर आने लगी | पर खालसे ने आत्म ज्ञान नहीं छोड़ा , उस का परचार चलता रहा और मौके पर तलवार भी चलती रही |
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