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'''मुनि''' (मौन से) जो [[तपस्]] करे।
 
राग-द्वेष-रहित संतों, साधुओं और ऋषियों को '''मुनि''' कहा गया है। मुनियों को यति, तपस्वी, भिक्षु और श्रमण भी कहा जाता है। [[भगवद्गीता]] में कहा है कि जिनका चित्त दु:ख से उद्विग्न नहीं होता, जो सुख की इच्छा नहीं करते और जो राग, भय और [[क्रोध]] से रहित हैं, ऐसे निश्चल बुद्धिवाले मुनि कहे जाते हैं। वैदिक ऋषि जंगल के कंदमूल खाकर जीवन निर्वाह करते थे।