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त्रिदिब देखने मे सुंदर थे एवम इसि कारण उन्हे भुखी पीढी का राजकुमार कहा जाता था।
==भुखी पीढी सृजनकर्मों का कापिराइट==
भुखी पीढी आंदोलनकारियों ने युरोप-अमरिका से लाये हुये '''कापिराइट''' आवधारणा को नहीं स्वीकारा। आंदोलनकारियॉं का कहना था कि भारत में महाभारत, रामायण, रामचरितमानस आदि लेखन का कोइ कापिराइट जब था ही नहीं तो भुखी पीढी, जो उपनिवेशवादी अवधारणायों के खिलाफ है, यह बला को क्यों स्वीकारे। उनलोगोंका सृजनको कोइ भी बे़झिझक पकाश क्र सकता है।
==कृतियां==
*'''घुलघुलि'''। हंगरी प्रिन्टर्स, २२/६ भेरनेर लेन, कोलकाता ७०० ०५६ ( १९६५ )
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