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स्वागत'', [[श्रीधर पाठक]] ने ''श्री जार्ज वन्दना'' तथा [[नाथूराम शर्मा 'शंकर']] ने ''महेन्द्र मंगलाष्टक'' जैसी हिन्दी में उत्कृष्ट भक्तिभाव की
रचनायें लिखकर ''राजभक्ति'' प्रदर्शित की थी। फिर भला रवीन्द्रनाथ ठाकुर कैसे पीछे रहते! उन्होंने १९११ में ''भारत भाग्य विधाता'' गीत की रचना की। वे बहुत बडे आदमी थे, उनकी ऊँची पहुँच थी अतः जार्ज के स्वागत में उन्हें यह गीत पढने की सुविधा दी गयी। बाद में उन्हें ब्रिटिश सरकार ने ''सर'' की उपाधि दी। यह अलग बात है कि १९१९ में ''जलियाँवाला बाग काण्ड'' से दुःखी होकर उन्होंने वह उपाधि वापिस लौटा दी।" पूरा गीत देने के पश्चात् जो ''नोट'' दिया गया वह इससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। नोट में लिखा है:"पूरे गीत में दो-दो विस्मयादिवोधक सम्बोधन चिन्ह (!!) केवल अन्तिम पंक्ति से पहली पंक्ति में हैं जो [[राजेश्वर]] (जार्ज पंचम) को विशेष रूप से सम्बोधित किये जाने का संकेत देते हैं।"
 
==आलोचना==
 
== सन्दर्भ ==
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