"ऍक्स किरण" के अवतरणों में अंतर

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==एक्सरे का वर्णक्रम और परमाणुओं की संरचना==
{{मुख्य|एक्सरे का वर्णक्रम और परमाणुओं की संरचना}}
 
===एक्सरे औरउत्पादन मणिभ=के उपकरण==
{{मुख्य|एक्स किरण नलिका}}
 
==एक्सरे और मणिभ==
एक्सरे से मणिभ संरचना जानने में विशेष सहायता मिलती है (देखें, [[एक्सरे और मणिभ संरचना]])।
 
===एक्सरे के अन्य उपयोग===
चिकित्सीय उपयोगों के अलावा भी एक्सरे का अनेकों प्रकार से उपयोग किया जाता है। एक्सरे के विशिष्ट गुणों के कारण उनका उपयोग विस्तृत रूप से विज्ञान की अनेक शाखाओं तथा विभिन्न उद्योगों में होता आ रहा है। उद्योगों में, विशेषत: निर्माण तथा निर्मित पदार्थो के गुणों के नियंत्रण में, एक्सरे का बहुत उपयोग होता है। निर्मित पदार्थो की अंतस्य त्रुटियाँ एक्सरे फोटोग्राफों द्वारा सरलता से ज्ञात की जा सकती हैं। विमान तथा उसी प्रकार के साधनों के यंत्रों में अति तीव्र वेग तथा चरम भौतिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता हैं; ऐसे यंत्रों के निर्माण में प्रत्येक अवयव अंतर्बाह्य निर्दोष तथा यथार्थ होना चाहिए। ऐसे प्रत्येक अवयव की परीक्षा एक्सरे से की जाती है और सदोष अवयवों का त्याग किया जाता है। धातु एक्सरे का अवशोषण करते हैं, अत: धातुओं के अंतर्भागों की परीक्षा के लिए मृदु एक्सरे अनुपयुक्त होते हैं। विशाल आकार के धात्वीय पदार्थो के लिए अत्युच्च विभव के एक्सरे की आवश्यकता होती है।
 
[[धातु विज्ञान]] तथा धातुगवेषणा में एक्सरे अत्यंत उपयोगी हैं। धातु भी मणिभीय होते हैं, किंतु इनके मणिभ सूक्ष्म होते हैं और वे यथेच्छ प्रकार से स्थापित रहते हैं, अत: धातुओं की लावे-प्रतिमा में सामान्यत: संकेंद्र वर्तुल रहते हैं। प्रत्येक वर्तुल एक समान तीव्रता का होता है, किंतु किसी भौतिक क्रिया से कणों के आकारों में वृद्धि हो जाने पर इन वर्तुलों में बिंदु भी आते हैं। अत: एक्सरे व्याभंग द्वारा इसका ठीक ठीक पता चल जाता है कि धात्वीय मणिभों के कण किस प्रकार के हैं और उनका आकार आदि कैसा है। इस ज्ञान का धातुविज्ञान में अत्यंत महत्व है। धातु के पदार्थ बनाने के समय उष्मा के कारण उनमें अंतर्विकृति आ जाती है। धातु को मोड़ने से भी उसमें अंतर्विकृति हो जाती है। ऐसी विकृतियों का विश्लेषण एक्सरे से हो सकता है। इस प्रकार विशिष्ट गुणों से युक्त निर्दोष धातु प्राप्त करने में एक्सरे का विशेष उपयोग होता है।
 
प्रकाश सूक्ष्मदर्शी से जिन बातों का पता नहीं चल पाता उनका ज्ञान सरलतापूर्वक एक्सरे सूक्ष्मदर्शी से हो जाता है।
 
==संदर्भ ग्रंथ==
* ए. एच. कॉम्पटन तथा एलीसन : एक्सरे इन्‌ थ्योरी ऐंड एक्स्पेरिमेंट (डी. ह्वान नोस्ट्रांग कंपनी, न्यूयॉर्क, 1935); * स्प्राऊल : एक्सरेज़ इन प्रैक्टिस (मैक्‌-ग्रॉ हिल कंपनी, न्यूयार्क, 1946);
* जॉर्ज एल. क्लार्क : ऐप्लाएड एक्सरेज़ (मैक-ग्रॉ हिल कंपनी, न्यूयार्क, 1955);
* ए. लिखती तथा डब्ल्यू. मिंडर : रंटजन फिज़ीक (स्प्रिंगर-फरलाग, विएना, 1955);
* रंटजन स्ट्राहलेन; (हैंडबुक डेर फिज़ीक, 30 भाग, स्प्रिंगर फरलाग, बर्लिन, 1957)
 
==संदर्भ ग्रंथ==