"बृहदीश्वर मन्दिर" के अवतरणों में अंतर

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यह सभी चीजें नटराज की मूर्ति और ब्रह्मांडीय नृत्य मुद्रा चित्रित करते हैं।
 
चिदम्बरम मंदिर 40 एकड़ में फैला हुआ है। यह भगवान शिव नटराज और भगवान गोविंदराज पेरुमल (विष्णु) कोसमर्पित है। यहां पर शैव व वैष्णव दोनों देवता एक ही स्थान पर प्रतिष्ठित है।
चिदंबरम के पवित्र गर्भ गृह में भगवान तीन स्वरूपों में विराजते हैं।
 
अपनी सहचरि शक्ति अथवा ऊर्जा जिसे शिवगामी कहते हैं के साथ निरंतर नृत्य कर रहे हैं। एक पर्दा इस स्थान कोढक लेता है तब स्वर्ण विल्व पत्रों की झालरे दिखाई पड़ती है जो भगवान की उपस्थिति का संकेत देती है। यह पर्दा बाहरी तरफ से गहरे रंग का (अज्ञानता का प्रतीक) है तथा अंदर से चमकीले लाल रंग का (बुद्धिमता और आनंद का प्रतीक) है। चिदंबरम रहस्यमय एक खाली स्थान है जिसे निष्कला थिरुमैनी कहते हैं। प्रतिदिन संस्कारों के दौरान उस दिन का प्रमुख पुजारी स्वयं देवत्व की अवस्था में परदे कोहटाते है यह अज्ञानता कोहटाने का संकेत है।
 
भगवान शिव की पूजा पंचभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु व आकाश) के रूप में की जाती है। चिदंबरम में आकाश रूप में पूजा की जाती है। (काचीपुरम के एकम्बेरश्वर मंदिर में पृथ्वी के रूप में, थिरुवनाईकवल के जम्बुकेश्वर मंदिर में जल के रूप में, तिरुवन्ना भलाई के अन्नामालइयर मंदिर में अग्रि के रूप में तथा श्री कलहस्थी में कलाहस्ती मंदिर में वायु के रूप में शिव की पूजा होती है।)
 
पांच मंदिरों में तीन मंदिर (कालहस्ती, काचीपुरम और चिदंबरम एक सीध में है जो कि ज्योतिषीय व भौगोलिक दृष्टि से चमत्कार है जबकि तिरुवनाइकणवल इस पवित्र अक्ष पर दक्षिण की ओर 3 अंश और उत्तरी छोर के पश्चिम से एक अंश पर स्थित है जबकि तिरुवन्नामलाई लगभग बीच में है दक्षिण की ओर 1.5 अश और पश्चिम की ओर 0.5 अश पर स्थित है।
 
चिदंबरम उन पांच स्थलों में है जहां शिव भगवान ने नृत्य किया था तथा सभी स्थानों पर मंच-सभाएं हैं। चिदंबरम में पोर सभई (स्वर्ण) है। (अन्य जगह थिरुवालान्याटु में रतिनासभई (मानिक सभा), कोर्वाल्लम में चित्रसभई (कलाकारी), मीनाक्षी मंदिर में रजत सभई- वैल्लीअम्बलम (रजत-वेली-चांदी) तथा तिरुनेलवेली में नेल्लैअप्पर मंदिर में थामिरा सभई (थामिरम- तांबा) है।)
कहते है कि मानिकाव्यसागर ने 2 कृतियों की रचना की थी जिसमें तिरुवासाकम का अधिकांश पाठ चिदंबरम में किया गया दूसरी थिरुकोवैय्यर का पूर्ण पाठ किया गया तथा मानिकाव्यासागर कोचिदंबरम में आत्म ज्ञान (अध्यात्मिक) की प्राप्ति हुई थी।
 
<big>कनक सभा :</big> यह चित सभई के ठीक सामने है जहां दैनिक पूजा की जाती है। चित सभा व कनक सभा की छतें स्वणीमण्रित है तथा उन्हें पौन्नबलम कहते हैं।
 
नृत्यसभा <big>:
<big>नृत्यसभा:</big> मान्यता के अनुसार यहां भगवान शिव ने देवी काली के साथ नृत्य किया था। इसमें 56 खम्बे हैं। इसमें शिव का एक पांव ऊपर है एक नीचे। शिव चांदी जडि़त हैं।
 
<big>राजा सभा</big> : यह 1000 पिल्लरों का हाल कमल या सहस्त्रनाम योगिक चक्र का प्रतीक है। सहस्त्र चक्र योगिक क्रिया का सर्वोच्च बिन्दु है यहां ध्यान लगने से परमात्मा से मिलन की अवस्था कोप्राप्त किया जा सकता है।
 
 
आदर्श शिव मंदिर की संरचना की व्याख्या : ===
 
आगम नियमों के अनुसार आदर्श शिव मंदिर में 5 प्रकार (परिक्रमा) होगी प्रत्येक दीवार से विभाजित होगी। अन्दर की परिक्रमा कोछोडक़र बाहरी परिक्रमा के पथ खुले आकाश के नीचे होंगे। सबसे अन्दर वाले परिक्रमा पथ पर प्रधान देवता व अन्य देवता विराजमान होंगे। प्रधान देवता के ठीक सीध में एक काठ का या पत्थर का विशाल ध्वजा स्तम्भ होगा। सबसे अन्दर के परिक्रमा पथ पर पवित्र गर्भ गृह होगा इसमें भगवान शिव विराजमान होंगे।
मंदिर इस प्रकार निर्मित है कि अपनी सभी जटिलताओं सहित मानव शरीर से मिलता है। एक-दूसरे में परिवेष्ठित कराती दीवारें मानव अस्तित्व के आवरण हैं।
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