"पुरुषोत्तम दास टंडन": अवतरणों में अंतर

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'''पुरूषोत्तम दास टंडन''' ([[1 अगस्त|१ अगस्त]] [[1882|१८८२]] - [[1 जुलाई|१ जुलाई]], [[1962|१९६२]]) [[भारत]] के स्वतन्त्रता सेनानी थे। [[हिंदी]] को भारत की [[राष्ट्रभाषा]] के पद पर प्रतिष्ठित करवाने में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान था। उनका जन्म [[उत्तर प्रदेश]] के [[इलाहाबाद]] मे हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता तो थे ही, समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ [[पत्रकार]], तेजस्वी वक्ता और [[समाज सुधारक]] भी थे। हिन्दी को भारत की राजभाषा का स्थान दिलवाने के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान किया। [[१९५०]] में वे भारतीय राश्ट्रीयराष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने। उन्हें भारत के राजनैतिक और सामाजिक जीवन में नयी चेतना, नयी लहर, नयी क्रान्ति पैदा करने वाले कर्मयोगी कहा गया।{{Ref_label|लक्ष्मीकांत वर्मा|क|none}} वे जन सामान्य में राजर्षि (संधि विच्छेदः राजा+ऋषि= राजर्षि अर्थात ऐसा प्रशासक जो ऋषि के समान सत्कार्य में लगा हुआ हो।) के नाम से प्रसिद्ध हुए। कुछ विचारकों के अनुसार स्वतंत्रता प्राप्त करना उनका पहला साध्य था। वे हिन्दी को देश की आजादी के पहले आजादी प्राप्त करने का साधन मानते रहे और आजादी मिलने के बाद आजादी को बनाये रखने का। टण्डन जी का राजनीति में प्रवेश हिन्दी प्रेम के कारण ही हुआ। १७ फरवरी १९५१ को मुजफ्फरनगर 'सुहृद संघ` के १७ वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर उन्होंने अपने भाषण में इस बात को स्वीकार भी किया था।{{Ref_label|स्वीकार|ख|none}}
 
==प्रारंभिक जीवन==
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