"प्रक्षेप": अवतरणों में अंतर

413 बाइट्स जोड़े गए ,  10 वर्ष पहले
सम्पादन सारांश नहीं है
No edit summary
[[चित्र:Projection orthogonale illustration.svg|right|thumb|एक '''घन''' का एक उर्ध्व समतल पर आर्थोगोनल प्रक्षेप]]
किसी वस्तु के भागों को समतल धरातल या सीधी रेखा पर निरूपित करने को '''प्रक्षेपण''' (Projection) नाम दिया गया है।
 
(क) '''गणित में प्रक्षेप से अभिप्राय''' : यदि सीधी रेखा १ पर स्थित A, B, C, D आदि बिंदुओं से सीधी रेखा पर लंब AA , BB CC आदि डाले जाएँ, तो रेखा १ पर "लंबकोणीय" प्रक्षेप प्राप्त होता है। इसी प्रकार यदि किसी ठोस पिंड के प्रत्येक बिंदु से किसी समतल धरातल पर लंब डाले जाएँ, तो हमें उस पिंड का लंबकोणीय प्रक्षेप उस धरातल पर प्राप्त होता है। यदि लंब रेखाएँ AA , BB , CC , आदि परस्पर समांतर हों, तब यह प्रक्षेप "समांतर प्रक्षेप' कहलाता है, यदि ये सभी रेखाएँ किसी एक बिंदु पर मिलती हों तब इसे केंद्रीय प्रक्षेप कहेंगे।
(४) '''रूढ़ प्रक्षेप''' : अज्यामितीय अथवा असंदर्श वर्ग के प्रक्षेप हैं, क्योंकि इनको गणित के सिद्धांत और तत्संबंधी गणनाओं के आधार पर बिना प्रतिबिंब डाले हुए खींचा जाता है। किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति हेतु ही ऐसा किया जाता है। यद्यपि इनका निर्माण सरल नहीं, फिर भी इनका उपयोग अन्य प्रकार के प्रक्षेपों की अपेक्षा अत्यधिक है और इन प्रक्षेपों पर विशेषकर संपूर्ण संसा का मानचित्र खींचा जाता है।
 
==इतिहास==
प्रक्षेपों के विकास के प्रारंभिक काल में विद्वानों ने प्रक्षेपों की अस्पष्ट विधियों से स्वर्ग को प्रदर्शित करने की चेष्टा की थी। संभवत: सर्वप्रथम प्रक्षेप का आविष्कार थेल्ज महोदय ने ६०० ई. पू. में किया था। वास्तव में यह केंद्रक खमध्य प्रक्षेप था जिसे जन्मपत्रक भी कहा गया। वास्तविक प्रक्षेप का आविष्कार ३०० ई. पू. में [[सिसली]] निवासी [[डायकेयरसूज]] द्वारा किया गया जिसपर खींचे मानचित्र पर सर्वप्रथम अक्षांश रेखा खींची गई। प्रक्षेप के विकास के इतिहास में इरेटोस्थेनीज़ (दूसरी ईसवी पूर्व), टॉल्मी (दूसरी ईसवी) तथा [[माकेंटर]] (१५१८-१५९४) के जीवनकाल महत्वपूर्ण रहे हैं। तदुपरांत सतत्‌ रूप से प्रक्षेपों का विकास एवं संशोधन होता रहा।
 
==इन्हें भी देखें==
*[[वर्णनात्मक ज्यामिति]] (Descriptive geometry)
 
==बाहरी कड़ियाँ==
 
[[श्रेणी:प्रक्षेप]]