"अलसी" के अवतरणों में अंतर

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{{स्रोतहीन|date=दिसम्बर 2011}}
[[चित्र:Grand-Reng JPG01.jpg|right|thumb|300px|खेत में फूली हुई तीसी]]
[[चित्र:Linum usitatissimum capsules, vlas zaadbollen.jpg|right|thumb|300px|अलसी के फल : कच्चा और पका हुआ]]
[[चित्र:Brown Flax Seeds.jpg|thumb|200px|left|तीसी के बीज]]
[[चित्र:Illustration Linum usitatissimum0.jpg|thumb|200px|तीसी का पौधा]]
'''अलसी''' या '''तीसी''' [[समशीतोष्ण]] प्रदेशों का पौधा है। रेशेदार फसलों में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। इसके रेशे से मोटे कपड़े, डोरी, रस्सी और टाट बनाए जाते हैं। इसके [[बीज]] से [[तेल]] निकाला जाता है और तेल का प्रयोग [[वार्निश]], रंग, [[साबुन]], रोगन, पेन्ट तैयार करने में किया जाता है। [[चीन]] सन का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। रेशे के लिए सन को उपजाने वाले देशों में [[रूस]], [[पोलैण्ड]], [[नीदरलैण्ड]], [[फ्रांस]], चीन तथा [[बेल्जियम]] प्रमुख हैं और बीज निकालने वाले देशों में [[भारत]], [[संयुक्त राज्य अमरीका]] तथा [[अर्जेण्टाइना]] के नाम उल्लेखनीय हैं। सन के प्रमुख निर्यातक [[रूस]], [[बेल्जियम]] तथा [[अर्जेण्टाइना]] हैं।
 
 
[[आयुर्वेद]] में अलसी को मंदगंधयुक्त, मधुर, बलकारक, किंचित कफवात-कारक, पित्तनाशक, स्निग्ध, पचने में भारी, गरम, पौष्टिक, कामोद्दीपक, पीठ के दर्द ओर सूजन को मिटानेवाली कहा गया है। गरम पानी में डालकर केवल बीजों का या इसके साथ एक तिहाई भाग [[मुलेठी]] का चूर्ण मिलाकर, [[क्वाथ]] (काढ़ा) बनाया जाता है, जो [[रक्तातिसार]] और मूत्र संबंधी रोगों में उपयोगी कहा गया है।
==चित्र दीर्घा ==
 
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[[चित्र:Grand-Reng JPG01.jpg|right|thumb|300px|खेत में फूली हुई तीसी]]
[[चित्र:Linum usitatissimum capsules, vlas zaadbollen.jpg|right|thumb|300px|अलसी के फल : कच्चा और पका हुआ]]
[[चित्र:Brown Flax Seeds.jpg|thumb|200px|left|तीसी के बीज]]
[[चित्र:Illustration Linum usitatissimum0.jpg|thumb|200px|तीसी का पौधा]]
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==बाहरी कड़ियाँ==
*[http://uthojago.wordpress.com/2011/03/22/अलसी-का-सेवन-किस-रोग-में-व-क/ अलसी का सेवन किस रोग में व कैसे करें?]