"रासायनिक तत्व" के अवतरणों में अंतर

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[[चित्र:Periodic table.svg|450px|thumbnail|right| रासायनिक तत्वों की [[आवर्त सारणी]]]]
 
'''रासायनिक तत्व''' (या केवल तत्व) (element) ऐसे उन ''शुद्ध पदार्थों'' को कहते हैं जो केवल एक ही तरह के परमाणुओं से बने होते हैं। या जो ऐसे परमाणुओं से बने होते हैं जिनके [[नाभिक]] में समान संख्या में [[प्रोटॉन]] होते हैं।
 
[[हाइड्रोजन|उदजन]], [[कार्बनप्रांगार]], [[नाइट्रोजन|भूयाति]], [[आक्सीजन|जारक]], तथा [[सिलिकॉन|सैकता]] आदि कुछ तत्व हैं। सन २००७ तक कुल ११७ तत्व खोजे या पाये जा चुके हैं जिसमें से ९४ तत्व धरती पर प्राकृतिक रूप से विद्यमान हैं। कृत्रिम नाभिकीय अभिक्रियाओं के परिणामस्वरूप उच्च [[परमाणु क्रमांक]] वाले तत्व समय-समय पर खोजे जाते रहे हैं।
 
सम्पूर्ण रासायनिक पदार्थ तत्वों से ही मिलकर बने होते हैं।
तत्व के संबंध में सबसे अधिक स्पष्ट विचार [[रॉबर्ट बॉयल]] (1627-1691 ई0) ने 1661 ई0 में रखा। उसने तत्व की परिभाषा यह दी कि हम तत्व उन्हें कहेंगें, जो किसी यांत्रिक या [[रासायनिक क्रिया]] से अपने से भिन्न दो पदार्थों में विभाजित न किए जा सकें।
 
स्टाल ने चार तत्व माने थे अम्ल, जल, पृथ्वी और फलॉजिस्टन। यह अंतिम तत्व वस्तुओं के जलने में सहायक होता था। रॉबर्ट बॉयल की परिभाषा को मानकर रसायनज्ञों ने तत्वों की सूची तैयार करनी प्रारंभ की। बहुत समय तक पानी तत्व माना जाता रहा। 1774 ई0 में प्रीस्टली ने [[ऑक्सीजन|जारक]] गैस तैयार की। कैवेंडिश ने 1781 ई0 में ऑक्सिजनजारक और हाइड्रोजनउदजन के योग से पानी तैयार करके दिखा दिया और तब पानी तत्व न रहकर यौगिकों की श्रेणी में आ गया। लाव्वाज्ये ने 1789 ई0 में यौगिक और तत्व के प्रमुख अंतरों को बताया। उसके समय तक तत्वों की संख्या 23 पहुँच चुकी थी। 19वीं शती में सर हंफ्री डेवी ने नमक के मूल तत्व सोडियम को भी पृथक् किया और कैल्सियम तथा पोटासियम को भी यौगिकों में से अलग करके दिखा दिया। डेवी के समय के पूर्व क्लोरिन के तत्व होने में संदेह माना जाता था। लोग इसे ऑक्सिम्यूरिएटिक अम्ल मानते थे, क्योकि यह म्यूरिएटिक अम्ल (नमक का तेजाब) के ऑक्सीकरण से बनता था, पर डेवी (1809-1818 ई0) ने सिद्ध कर दिया कि क्लोरीन तत्व है।
 
प्रकृति में कितने तत्व हो सकते हैं, इसका पता बहुत दिनों तक रसायनज्ञों को न था। अत: तत्वों की खोज के इतिहास में बहुत से ऐसे तत्वों की भी घोषणा कर दी गई, जिन्हें आज हम तत्व नहीं मानते। 20वीं शती में [[मोजली]] नामक तरुण वैज्ञानिक ने परमाणु संख्या की कल्पना रखी, जिससे स्पष्ट हो गया कि सबसे हलके तत्व [[हाइड्रोजन|उदजन]] से लेकर प्रकृति में प्राप्त सबसे भारी तत्व [[यूरेनियम|किरणात]] तक तत्वों की संख्या लगभग 100 हो सकती है। [[रेडियोधर्मिता|रेडियोधर्मी]] तत्वों की खोज ने यह स्पष्ट कर दिया कि तत्व बॉयल की परिभाषा के अनुसार सर्वथा अविभाजनीय नहीं है। प्रकृति में रेडियम[[तेजातु]] विभक्त होकर स्वयं दूसरे तत्वों में परिणत होता रहता है। प्रयोगों ने यह भी संभव करके दिखा दिया है कि हम अपनी प्रयोगशालाओं में तत्वों का विभाजन और नए तत्वों का निर्माण भी कर सकते हैं। यूरेनियमकिरणात के आगे 8-9 तत्वों को कृत्रिम विधि से बनाया भी जा सका है।
 
== इन्हें भी देखें ==
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