"कोश" के अवतरणों में अंतर

1 बैट् नीकाले गए ,  7 वर्ष पहले
*(4) निघंटुशेष
 
इन चारों कोशों को उन्होंने अपने व्याकरण के परिशिष्ट के रूप में दिया है।
 
दसवीं और तेरहवीं शती के बीच किसी समय [[पुरुषोत्तमदेव]] ने अमरकोश के परिशिष्ट के रूप में [[त्रिकांडशेष]] नामक कोश प्रस्तुत किया। इसमें बौद्ध संस्कृत वाङ्मय से महत्व के शब्द चुने गए हैं। उन्होंने [[हारावली]] नाम से एक अन्य कोश की रचना की है जिसमें त्रिकांडशेष की अपेक्षा अधिक महत्व के शब्द संग्रहीत हैं।