"विष्णु" के अवतरणों में अंतर

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#'''[[बुद्ध अवतार]]''': इसमें विष्णुजी [[बुद्ध]] के रूप में असुरों को वेद की शिक्षा के लिये तैयार करने के लिये प्रकट हुए।
#'''[[कल्कि अवतार]]''': इसमें विष्णुजी भविष्य में कलियुग के अंत में आयेंगे।
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'''अवतार -''' सम्पूर्ण सृष्टि श्री हरि विष्णु का स्वरुप है परन्तु जिस घट (शरीर ) में वह प्रगट हो जाते हैं उसे अवतार कहा जाता है.
सब घट मोरा साईयां सूनी सेज न कोय
बलिहारी वा घट की जेहि घट परगट होय.
 
'''चतुर्भज स्वरुप''' -श्री भगवान विष्णु शंख, चक्र गदा पद्म धारण करते हैं.उनका यह चतुर्भज स्वरुप क्या है? शंख शब्द का प्रतीक है, शब्द का तात्पर्य ज्ञान से है जो सृष्टि का मूल तत्त्व है. चक्र का अभिप्राय माया चक्र से है जो जड़ चेतन सभी को मोहित कर रही है. गदा ईश्वर की अनंत शक्ति का प्रतीक है और पद्म से तात्पर्य नाभि कमल से है जो सृष्टि का कारण है. इन चार शक्तियों से संपन्न होने के कारण श्री हरि को चतुर्भुज कहा है.
सन्दर्भ -बसंतेश्वरी भगवद्गीता से .................................................................................................................................................................................................................................................................
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