"कश्मीर का इतिहास" के अवतरणों में अंतर

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[[भारत]] के उत्तरतम राज्य [[जम्मू और कश्मीर]] का इतिहास अति प्राचीन काल से आरंभ होता है।
[[Imageचित्र:Dal Lake.jpg|right|thumb|250px|राजधानी में डल झील में एक शिकारे से दृश्य]]
 
==इतिहास और सभ्यता==
उज्जैन के महाराज [[विक्रमादित्य]] के अधीन छठी शताब्दी में एक बार फिर से हिन्दू धर्म की वापसी हुई। उनके बाद ललितादित्या हिन्दू शासक रहा, जिसका काल 697 ई. से 738 ई. तक था। अवन्तिवर्मन ललितादित्या का उत्तराधिकारी बना। उसने श्रीनगर के निकट अवंतिपुर बसाया। उसे ही अपनी राजधानी बनाया। जो एक समृद्ध क्षेत्र रहा। उसके खंडहर अवशेष आज भी शहर की कहानी कहते हैं।
यहां [[महाभारत]] युग के गणपतयार और खीर भवानी मन्दिर आज भी मिलते हैं। [[गिलगिट]] में पाण्डुलिपियां हैं, जो प्राचीन पाली भाषा में हैं। उसमें बौद्ध लेख लिखे हैं।
त्रिखा शास्त्र भी यहीं की देन है। यह कश्मीर में ही उत्पन्न हुआ। इसमें सहिष्णु दर्शन होते हैं।
चौदहवीं शताब्दी में यहां मुस्लिम शासन आरंभ हुआ। उसी काल में फारस से से सूफी इस्लाम का भी आगमन हुआ।
यहां पर ऋषि परम्परा, त्रिखा शास्त्र और सूफी इस्लाम का संगम मिलता है, जो कश्मीरियत का सार है। भारतीय लोकाचार की सांस्कृतिक प्रशाखा कट्टरवादिता नहीं है।
;ब्रिटिश इंडिया का विभाजन
* 1947 में 560 अर्ध्द स्वतंत्र शाही राज्य अंग्रेज साम्राज्य द्वारा प्रभुता के सिध्दांत के अंतर्गत 1858 में संरक्षित किए गये।
* केबिनेट मिशन ज्ञापन के तहत, [[भारत स्वतंत्रता अधिनियम, 1947]] द्वारा इन राज्यों की प्रभुता की समाप्ति घोषित हुई, राज्यों के सभी अधिकार वापस लिए गए, व राज्यों का भारतीय संघ में प्रवेश किया गया। ब्रिटिश भारत के सरकारी उत्तराधिकारियों के साथ विशेष राजनैतिक प्रबंध किए गए।
* कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने पाकिस्तान और भारत के साथ तटस्थ समझौता किया। पाकिस्तान के साथ समझौता पर हस्ताक्षर हुए।
* भारत के साथ समझौते पर हस्ताक्षर से पहले, पाकिस्तान ने कश्मीर की आवश्यक आपूर्ति को काट दिया जो तटस्थता समझौते का उल्लंघन था। उसने अधिमिलन हेतु दबाव का तरीका अपनाना आरंभ किया, जो भारत व कश्मीर, दोनों को ही स्वीकार्य नहीं था।
* जब यह दबाव का तरीका विफल रहा, तो पठान जातियों के कश्मीर पर आक्रमण को पाकिस्तान ने उकसाया, भड़काया और समर्थन दिया। तब तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद का आग्रह किया। यह [[24 अक्तूबर]], [[1947]] की बात है।
* [[नेशनल कांफ्रेंस]], जो कश्मीर सबसे बड़ा लोकप्रिय संगठन था, व अध्यक्ष [[शेख अब्दुल्ला]] थे; ने भी भारत से रक्षा की अपील की।
* हरि सिंह ने गवर्नर जनरल लार्ड [[माउंटबेटन]] को कश्मीर में संकट के बारे में लिखा, व साथ ही भारत से अधिमिलन की इच्छा प्रकट की। इस इच्छा को माउंटबेटन द्वारा [[27 अक्तूबर]], [[1947]] को स्वीकार किया गया।
* [[भारत सरकार अधिनियम, 1935]] और [[भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947]] के तहत यदि एक भारतीय राज्य प्रभुत्व को स्वींकारने के लिए तैयार है, व यदि भारत का गर्वनर जनरल इसके शासक द्वारा विलयन के कार्य के निष्पादन की सार्थकता को स्वीकार करे, तो उसका भारतीय संघ में अधिमिलन संभव था।
* पाकिस्तान द्वारा हरि सिंह के विलयन समझौते में प्रवेश की अधिकारिता पर कोई प्रश्न नहीं किया गया। कश्मीर का भारत में विलयन विधि सम्मत माना गया। व इसके बाद पठान हमलावरों को खदेड़ने के लिए [[27 अक्तूबर]], [[1947]] को भारत ने सेना भेजी, व कश्मीर को भारत में अधिमिलन कर यहां का अभिन्न अंग बनाया।
===संयुक्त राष्ट्र===
* भारत कश्मीर मुद्दे को [[1 जनवरी]], [[1948]] को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले गया। परिषद ने भारत और पाकिस्तान को बुलाया, व स्थिति में सुधार के लिए उपाय खॊजने की सलाह दी। तब तक किसी भी वस्तु परिवर्तन के बारे में सूचित करने को कहा। यह [[17 जनवरी]], [[1948]] की बात है।
* भारत और पाकिस्तान के लिए एक तीन सदस्यी संयुक्त राष्ट्र आयोग (यूएनसीआईपी) [[20 जनवरी]], [[1948]] को गठित किया गया, जो कि विवादों को देखे। [[21 अप्रैल]], [[1948]] को इसकी सदस्यता का प्रश्न उठाया गया।
* तब तक कश्मीर में आपातकालीन प्रशासन बैठाया गया, जिसमें, [[5 मार्च]], [[1948]] को शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में अंतरिम सरकार द्वारा स्थान लिया गया।
* [[13 अगस्त]], [[1948]] को यूएनसीआईपी ने संकल्प पारित किया जिसमें युध्द विराम घोषित हुआ, पाकिस्तानी सेना और सभी बाहरी लोगों की वापसी के अनुसरण में भारतीय बलों की कमी करने को कहा गया। जम्मू और कश्मीर की भावी स्थिति का फैसला 'लोगों की इच्छा' के अनुसार करना तय हुआ। संपूर्ण जम्मू और कश्मीर से पाकिस्तान सेना की वापसी, व जनमत की शर्त के प्रस्ताव को माना गया, जो- कभी नहीं हुआ।
* संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान के अंतर्गत युध्द-विराम की घोषणा की गई। यूएनसीआईपी संकल्प - [[5 जनवरी]], [[1949]]। फिर [[13 अगस्त]], [[1948]] को संकल्प की पुनरावृति की गई। महासचिव द्वारा जनमत प्रशासक की नियुक्ति की जानी तय हुई।
===निर्माणात्मक वर्ष ===
* ऑल जम्मू और कश्मीर नेशनल कान्फ्रेंस ने [[अक्तूबर]],[[1950]] को एक संकल्प किया। एक संविधान सभा बुलाकर वयस्क मताधिकार किया जाए। अपने भावी आकार और संबध्दता जिसमें इसका भारत से अधिमिलन सम्मिलित है का निर्णय लिया जाये, व एक संविधान तैयार किया जाए।
* चुनावों के बाद संविधान सभा का गठन [[सितम्बर]], [[1951]] को किया गया ।
* ऐतिहासिक 'दिल्ली समझौता - कश्मीरी नेताओं और भारत सरकार द्वारा- जम्मू और कश्मीर राज्य तथा भारतीय संघ के बीच सक्रिय प्रकृति का संवैधानिक समझौता किया गया, जिसमें भारत में इसके विलय की पुन:पुष्टि की गई।
* जम्मू और कश्मीर का संविधान, संविधान सभा द्वारा [[नवम्बर]], [[1956]] को अंगीकृत किया गया। यह [[26 जनवरी]], [[1957]] से प्रभाव में आया।
* राज्य में पहले आम चुनाव अयोजित गए, जिनके बाद [[मार्च]], [[1957]] को शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में नेशनल कांफ्रेंस द्वारा चुनी हुई सरकार बनाई गई ।
* राज्य विधान सभा में [[१९५९]] में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया, जिसमें राज्य में भारतीय चुनाव आयोग और भारत के उच्चतम न्यायालय के क्षेत्राधिकार के विस्तार के लिए राज्य संविधान का संशोधन पारित हुआ।
* राज्य में दूसरे आम चुनाव [[१९६२]] में हुए जिनमें शेख अब्दुल्ला की सत्ता में पुन: वापसी हुई।
 
===हजरत बल से पवित्र अवशेष की चोरी===
[[दिसम्बर]], [[1963]] में एक दुर्भाग्यशाली घटना में हजरत बल मस्जिद से पवित्र अवशेष की चोरी हो गई। मौलवी फारूक के नेतृत्व के अधीन एक कार्य समिति द्वारा भारी आन्दोलन की शुरूआत हुई, जिसके बाद पवित्र अवशेष की बरामदगी और स्थापना की गई।
 
===पाकिस्तान के साथ युद्ध ===
* [[फरवरी]], [[1972]] में चौथे आम चुनाव हुए जिनमें पहली बार जमात-ए-इस्लामी ने भाग लिया व 5 सीटें जीती। इन चुनावों में भी कांग्रेस सरकार बनी।
* भारत और पाकिस्तान के बीच [[3 जुलाई]], [[1972]] को ऐतिहासिक 'शिमला समझौता हुआ, जिसमें कश्मीर पर सभी पिछली उद्धोषणाएँ समाप्त की गईं, जम्मू और कश्मीर से संबंधित सारे मुद्दे द्विपक्षीय रूप से निपटाए गए, व - युध्द विराम रेखा को नियंत्रण रेखा में बदला गया।
* [[फरवरी]], [[1975]] को कश्मीर समझौता समाप्त माना गया, व भारत के प्रधानमंत्री के अनुसार 'समय पीछे नहीं जा सकता'; तथा कश्मीरी नेतृत्व के अनुसार- 'जम्मू और कश्मीर राज्य का भारत में अधिमिलन कोई मामला नहीं' कहा गया।
* [[जुलाई]], [[1975]] में शेख अब्दुल्ला मुख्य मंत्री बने, जनमत फ्रंट स्थापित और नेशनल कांफ्रेंस के साथ विलय किया गया।
* [[जुलाई]], [[1977]] को पाँचवे आम चुनाव हुए जिनमें नेशनल कांफ्रेंस पुन: सत्ता में लौटी - 68% मतदाता उपस्थित हुए।
* शेख अब्दुल्ला का निधन [[8 सितम्बर]], [[1982]] होने पर, उनके पुत्र डा. फारूख अब्दुल्ला ने अंतरिम मुख्य मंत्री की शपथ ली व छठे आम चुनावों में [[जून]],[[1983]] में नेशनल कांफ्रेंस को विजय मिली।
 
==इन्हें भी देखें==
* [[राजतरंगिणी]]
* [[ललितादित्य]]
* [[कश्मीर]]
 
==बाहरी कड़ियाँ==
74,334

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