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==आविष्कार एवं अनुसंधान का इतिहास==
* [[राबर्ट हुक]] ने 1665 में बोतल की [[कार्क]] की एक पतली परत के अध्ययन के आधार पर मधुमक्खी के छत्ते जैसे कोष्ठ देखे और इन्हें कोशा नाम दिया। यह तथ्य उनकी पुस्तक माइक्रोग्राफिया में छपा। राबर्ट हुक ने कोशा-भित्तियों के आधार पर कोशा शब्द प्रयोग किया।
 
* '''1674''' लुइवेनहाक ने जीवित कोशा का सर्वप्रथम अध्ययन किया।
 
* तदरोचित नामक वैज्ञानिक ने 1824 में कोशावाद (cell theory) का विचार प्रस्तुत किया, परन्तु इसका श्रेय वनवस्पति-विज्ञान-शास्त्री श्लाइडेन (Matthias Jakob Schleiden) और जन्तु-विज्ञान-शास्त्री श्वान (Theodor Schwann) को दिया जाता है जिन्होंने ठीक प्रकार से कोशावाद को (1839 में) प्रस्तुत किया और बतलाया कि 'कोशाएँ पौधों तथा जन्तुओं की रचनात्मक इकाई हैं।'
 
* '''1855''' : रुडॉल्फ विर्चो ने विचार रखा कि कोशिकाएँ सदा [[कोशिका विभाजन|कोशिकाओं के विभाजन]] से ही पैदा होती हैं।
 
* '''1953''': वाट्सन और क्रिक (Watson and Crick) ने डीएनए के 'डबल-हेलिक्स संरचना' की पहली बार घोषणा की।
[[चित्र:Celltypes.svg|right|thumb|300px|दो प्रकार की कोशिकाएँ : यूकैरोटिक (बाएँ) तथा प्रोकैरिओटिक (दाएँ)]]
कोशिकाएँ दो प्रकार की होती हैं,
* [[प्रोकैरियोटिक कोशिका]] (eukaryotic cells) तथा
* [[यूकैरियोटिक कोशिका]] (Prokaryotic cell)
प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ प्रायः स्वतंत्र होती हैं जबकि यूकैरियोटिक कोशिकाएँ, बहुकोशीय प्राणियों में पायी जाती हैं। प्रोकैरियोटिक कोशिका में कोई स्पष्ट [[केन्द्रक]] नहीं होता है। केन्द्रकीय पदार्थ [[कोशिका द्रव]] में बिखरे होते हैं। इस प्रकार की कोशिका जीवाणु तथा नीली हरी सैवाल में पायी जाती है। सभी उच्च श्रेणी के पौधों और जन्तुओं में यूकैरियोटिक प्रकार की कोशिका पाई जाती है। सभी यूकैरियोटिक कोशिकाओ में संगठित [[केन्द्रक]] पाया जाता है जो एक आवरण से ढका होता है।
 
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[[श्रेणी:कोशिकाविज्ञान]]
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