"अश्विनीकुमार (पौराणिक पात्र)" के अवतरणों में अंतर

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{{otheruses4|हिन्दू देवता|१९७२ पद्म भूषण धारक|अश्विनी कुमार (पद्म भूषण)}}
 
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'''अश्विनीकुमार''' त्वष्टा की पुत्री प्रभा नाम की स्त्री से उप्तन्न सूर्य के दो पुत्र। वे [[आयुर्वेद]] के आदि आचार्य माने जाते हैं।
{{otheruses4|हिन्दू पौराणिक कथाओं के दो यमज भ्राताओं|[[भारतीय प्रशासनिक सेवा]] में अफ़सर रहे व्यक्ति|अश्विनी कुमार (प्रशासकीय अधिकारी)}}
 
 
'''अश्विनीकुमार''' त्वष्टा की पुत्री प्रभा नाम की स्त्री से उप्तन्न सूर्य के दो पुत्र। वे [[आयुर्वेद]] के आदि आचार्य माने जाते हैं।
 
एक बार सूर्य तेज को सहन करने में असमर्थ होकर प्रभा अपनी दो संतति यम और यमुना तथा अपनी छाया छोड़कर चुपके से भाग गई और घोड़ी बनकर तप करने लगी । इस छाया से भी सूर्य को दो संतति हुई । शनि और ताप्ती । जब छाया ने प्रभा की संतति का अनादर आरंभ किया, तब यह बात खुल गई कि प्रभा तो भाग गई है । इसके उपरातं सूर्य घोड़ा बनकर प्रभा के पास, जो अश्विनी के रूप में थी, गए । इस संयोग से दोनों अश्विनीकुमारों की उत्पत्ति हुई जो देवताओं के वैद्य हैं।
अश्विनीकुमार अश्वेदव, प्रभात के जुड़वें देवता द्यौस के पुत्र, युवा और सुंदर। इनके लिए 'नासत्यौ' विशेषण भी प्रयुक्त होता है। इनके रथ पर पत्नी सूर्या विराजती है और रथ की गति से सूर्या की उत्पति होती है। ये देवचिकित्सक और रोगमुक्त करनेवाले हैं। इनकी उत्पति निश्चित नहीं कि वह प्रभात और संध्या के तारों से है या गोधूली या अर्ध प्रकाश से। परंतु उनका संबंध रात्रि और दिवस के संधिकाल से ऋग्वेद ने किया है। उनकी स्तुति ऋग्वेद की अनेक ऋचाओं में की गई है। वे कुमारियों को पति, वृद्धों को तारूण्य, अंधों को नेत्र देनेवाले कहे गए हैं। [[महाभारत]] के अनुसार [[नकुल]] और [[सहदेव]] उन्हीं के पुत्र थे।
 
[[श्रेणी:आयुर्वेद|कुमार, अश्विनी]]
[[श्रेणी:हिंदू देवता|कुमार, अश्विनी]]
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