"अंग्रेजी हटाओ आंदोलन" के अवतरणों में अंतर

छो
Bot: अंगराग परिवर्तन
(Added {{स्रोतहीन}} tag to article)
छो (Bot: अंगराग परिवर्तन)
{{स्रोतहीन|date=सितंबर 2011}}
स्वतंत्र [[भारत]] में साठ के दशक में 'अंग्रेजी हटाओं-हिन्दी लाओ' के आंदोलन का सूत्रपात [[राममनोहर लोहिया]] ने किया था। इस आन्दोलन की गणना अब तक के कुछ इने गिने आंदोलनों में की जा सकती है। समाजवादी राजनीति के पुरोधा डॉ. राममनोहर लोहिया के भाषा संबंधी समस्त चिंतन और आंदोलन का लक्ष्य भारतीय सार्वजनिक जीवन से [[अंगरेजी]] के वर्चस्व को हटाना था। लोहिया को अंगरेजी भाषा मात्र से कोई आपत्ति नहीं थी। अंगरेजी के विपुल साहित्य के भी वह विरोधी नहीं थे, बल्कि विचार और शोध की भाषा के रूप में वह अंगरेजी का सम्मान करते थे।
 
लोहिया जब 'अंगरेजी हटाने' की बात करते हैं, तो उसका मतलब 'हिंदी लाना' नहीं है। बल्कि अंगरेजी हटाने के नारे के पीछे लोहिया की एक खास समझदारी है। लोहिया भारतीय जनता पर थोपी गई अंगरेजी के स्थान पर भारतीय भाषाओं को प्रतिष्ठा दिलाने के पक्षधर थे। 19 सितंबर 1962 को [[हैदराबाद]] में लोहिया ने कहा था,
यह यह आंदोलन सफल होता तो आज भाषाई त्रासदी का यह दौर न देखना पडता। लोहिया इस तर्क कि "अंग्रेजी का विरोध न करें, हिन्दी का प्रचार करें"' की अंतर्वस्तु को भली भांति समझते थे। वे जानते थे कि यह एक ऐसा भाषाई षडयंत्र है जिसके द्वारा औपनिवेशिक संस्कृति की मृत प्राय अमरबेल को पुन: पल्लवित होने का अवसर प्राप्त हो जायेगा। इस भाषाई षडयंत्र को समझने वाले लोहिया अपने प्रयत्न में असफल रहे या असफल कर दिये गये किन्तु विश्व स्तर पर इस साम्राज्यवादी भाषाई मंशा को समझने वाले [[चीन]] के [[माउत्से तुंग]] ने अपने देश चीन में जीवन के हर आयाम में अपनी चीनी भाषा को स्थापित किया।
 
== इन्हें भी देखें ==
* [[हिन्दी आन्दोलन]]
* [[नागरी आन्दोलन]]
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.amarujala.com/Vichaar/VichaarDetail.aspx?nid=944&tp=b&Secid=4&SubSecid=6 लोहिया का अंगरेजी विरोध] (गंगा सहाय मीणा)
 
[[श्रेणी:भारत के आन्दोलन]]
74,334

सम्पादन