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[[आयुर्वेद]] में अलसी को मंदगंधयुक्त, मधुर, बलकारक, किंचित कफवात-कारक, पित्तनाशक, स्निग्ध, पचने में भारी, गरम, पौष्टिक, कामोद्दीपक, पीठ के दर्द ओर सूजन को मिटानेवाली कहा गया है। गरम पानी में डालकर केवल बीजों का या इसके साथ एक तिहाई भाग [[मुलेठी]] का चूर्ण मिलाकर, [[क्वाथ]] (काढ़ा) बनाया जाता है, जो [[रक्तातिसार]] और मूत्र संबंधी रोगों में उपयोगी कहा गया है।
{{-}}
== चित्र दीर्घा ==
{{nutritionalvalue | name=अलसी के बीज| kJ=2234| protein=18.29 g | fat=42.16 g | satfat=3.663 | monofat=7.527 | polyfat=28.730 | carbs=28.88 g | fiber=27.3 g | | sugars=1.55 g | iron_mg=5.73 | calcium_mg=255 | magnesium_mg=392 | phosphorus_mg=642 | potassium_mg=813| zinc_mg=4.34 | vitC_mg=0.6 | pantothenic_mg=0.985 | vitB6_mg=0.473 | folate_ug=0 | thiamin_mg=1.644 | riboflavin_mg=0.161 | niacin_mg=3.08 | right=1 | source_usda=1 }}
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</gallery>
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://flaxindia.blogspot.com/2010/07/blog-post_16.html आयुर्धक, आरोग्यवर्धक, चमत्कारी दिव्य भोजन अलसी]
* [http://uthojago.wordpress.com/2011/03/22/अलसी-का-सेवन-किस-रोग-में-व-क/ अलसी का सेवन किस रोग में व कैसे करें?]
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