"ऊतकविज्ञान": अवतरणों में अंतर

16 बाइट्स जोड़े गए ,  9 वर्ष पहले
छो
Bot: अंगराग परिवर्तन
छो (r2.7.3) (Robot: Adding war:Histolohiya)
छो (Bot: अंगराग परिवर्तन)
'''ऊतक विज्ञान''' या '''ऊतिकी''' (Histology) की परिभाषा देते हुए स्टोरर ने लिखा है : ''ऊतक विज्ञान या सूक्ष्म शरीर (microscopic anatomy) अंगों के भीतर ऊतकों की संरचना तथा उनके विन्यास (arrangement) के अध्ययन को कहते हैं।'' अँगरेजी का हिस्टोलॉजी शब्द यूनानी भाषा के शब्द हिस्टोस्‌ (histos) तथा लॉजिया (logia) से मिलकर बना है, जिनका अर्थ होता है ''ऊतकों (tissues) का अध्ययन।'' अत: ऊतक विज्ञान वह विज्ञान है, जिसके अंतर्गत ऊतकों की सूक्ष्म संरचना तथा उनकी व्यवस्था अथवा विन्यास का अध्ययन किया जाता है। 'ऊतक' शब्द फ्रांसीसी भाषा के शब्द टिशू (tissu) से निकला है, जिसका अर्थ होता है संरचना या बनावट (texture)। इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम फ्रांसीसी शारीर वैज्ञानिक (anatomist) बिशैट (Bichat) ने 18वीं शताब्दी के अंत में शारीर या शरीर-रचना विज्ञान के प्रसंग में किया था। उन्होंने अपनी पुस्तक में लगभग बी प्रकार के ऊतकों का उल्लेख किया है। किंतु, आजकल केवल चार प्रकार के मुख्य ऊतकों को मान्यता प्राप्त है, जिनके नाम हैं : इपीथिलियमी (epithelial), संयोजक (connective), पेशीय (musclar) और तंत्रिकीय ऊतक (nervous tissues)।
 
== परिचय ==
आदिकाल से ही मनुष्य पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों को उनकी आकृति तथा आकार के द्वारा पहचानता रहा है। विज्ञान के विकास के साथ वनस्पतियों तथा जंतुओं के शरीर के भीतर की संरचना जानने की भी जिज्ञासा उत्पन्न होती गई। इसी जिज्ञासा के फलस्वरूप शल्यक्रिया (surgery) का विकास हुआ। चिकित्सा तथा जीववैज्ञानिकों ने पशु और वनस्पतियों की चीरफाड़ करके उनके अंग की संरचनाओं-अंग प्रतयंगों-का अध्ययन आरंभ किया। इसी अध्ययन के फलस्वरूप संपूर्ण शारीर (gross anatomy) की उत्पत्ति हुई। इसी के साथ जब सूक्ष्मदर्शी यंत्रों (microscopes) का विकास हुआ तो जटिल आंतरिक संरचनाएँ भी स्पष्ट होती गई। इस सूक्ष्मदर्शीय यांत्रिक अध्ययन को भौतिकी की संज्ञा प्रदान की गई। अत: ब्लूम तथा फॉसेट के शब्दों में 'ऊतिकी या सूक्ष्मदर्शी शारीर के अंतर्गत शरीर की वह आंतरिक संरचना आती है जो नंगी आँखों से नहीं दिखलाई देती''।
 
उपर्युक्त विवरण से यह प्रकट होता है कि कोशिकाविज्ञान तथा ऊतकविज्ञान का एक साथ अध्ययन किया जाना चाहिए। चूँकि कोशिकाएँ अतिसूक्ष्म संरचनाएँ होती हैं, अत: हम ऊतक विज्ञान को सूक्ष्मशारीर (microscopic anatomy) का ही पर्याय मानकर ऊतिकी का अध्ययन करेंगे। चूँकि ऊतक कोशिकाओं द्वारा ही बने होते हैं, अत: ऊतिकी का अध्ययन हम कोशिकाओं के ही माध्यम से करेंगे।
 
== ऊतिकीय विधियाँ ==
ऊतकों के सम्यक्‌ अध्ययन के लिए यह आवश्यक है कि सूक्ष्मदर्शक यंत्र तक उन्हें लाने के पूर्व उनको विशेष पद्धतियों द्वारा उपचार (treatment) किया जाए। ऊतक का सूक्ष्म अध्ययन करने के लिए यह अनिवार्य है कि वह अति पतला हो। जीवित ऊतक के विभिन्न भागों में बहुत समानताएँ पाई जाती हैं। अत: उसका ठीक ठीक अध्ययन संभव नहीं होता। इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए सर्वप्रथम ऊतक को 4 से 8 माइक्रॉन तक विच्छेदित कर लिया जाता है। इस कार्य के लिए 'माइक्रोटोम' यंत्र का प्रयोग किया जाता है। जीवित ऊतक का इतना सूक्ष्म विच्छेद तब तक संभव नहीं होता, जब तक वह कड़ा न हो। अत: ऊतक को कड़ा करने के लिए उसे विशेष प्रकार के रसायनों के घोल में स्थायीकृत (fix) किया जाता है। स्थायीकरण के उपरांत इस ऊतक को अलकोहलों के विभिन्न घोलों, अभिरंजकों (stains) तथा अन्य रसायनों में उपचार (treat) करके निर्जल कर लिया जाता है। अंत में इसे विशेष ताप पर पहले से ही गलाकर तैयार रखा जाता है, डाल दिया जाता है। कुछ समय बाद मोम के साथ ही ऊतक के टुकड़ों को चतुर्भुजाकार (rectangular) साँचे में डाल दिया जाता है। जब मोम जमकर कड़ा हो जाता है, तो उसके छोटे छोटे टुकड़े काट लिए जाते हैं। अंत में इन टुकड़ों को माइक्रोटोम के विशेष भाग में जमाकर उसमें एक अति धारदार चाकू (razor) से विशेष मोटाई के अनेक सेक्शन काट लिए जाते हैं। इन सेक्शनों को काँच की पट्टियों पर रखकर अध्ययन के लिए रख लिया जाता है। काँच की पट्टियों को हीटिंग प्लेट पर रखकर उनका मोम गला लिया जाता है और ऊतक का सेक्शन काँच की पट्टी पर जम जाता है। इन सेक्शनों से लदी काँच की पट्टियों को विशेष रसायनों तथा अल्कोहल के घोलों में निर्जल कर लिया जाता है। फिर इसे डाइलीन या सेडार उड आयल में भिगो दिया जाता है। अब यह सेक्शन सूक्ष्म अध्ययन के लिए तैयार हो गया।
 
ऊतकों का अध्ययन उनकी सूक्ष्म संरचना का ज्ञान प्राप्त करने के लिए किया जाता है। अत: ऊतकी की संरचना का संक्षिप्त उल्लेख आवश्यक है।
 
== ऊतकों की संरचना (structure of tissues) ==
ऊतकों की संरचना में तीन प्रकार के मुख्य घटक दिखलाई देते हैं : कोशिकाएँ, मैट्रिक्स तथा तरल द्रव्य।
 
=== कोशिकाएँ (cells) ===
{{मुख्य|कोशिका}}
 
(8) लवक
 
=== मैट्रिक्स (matrix) ===
मैट्रिक्स या आधात्री को इंटर्सेल्यूलर (intercellular) या ग्राउंड सब्स्टैंस (ground substance) भी कहा जाता है। जैसा नाम से ही स्पष्ट है, यह कोशिकाओं के मध्य भाग में स्थित होकर उन्हें परस्पर जोड़ने का कार्य करती है। ये सजीव तथा निर्जीव दोनों प्रकार की होती हैं। साधारणतया आधातृ संयोजक ऊतकों (connective tissues) में पाई जाती हैं। यह तंतु या रेशों द्वारा बनी होती है, जो तीन प्रकार के होते हैं : कॉलाजनी (collagenous), जालीदार (reticluar) तथा एलास्टिक (elastic)। यह सजातीय या समांगी (homogenous) पदार्थ होता है जो तरल अथवा जिलेटिन जैसी स्थित में रहता है। यह उपकला (epithelium), कोशिकाओं (capillaries) तथा छोटी-छोटी शिराओं (veins) के नीचे जमी रहती है। इसमें म्यूकोपोलीसैक्केराइड अम्ल (mucopolysaccharide acids) पाए जाते हैं। आधात्री कोमल (soft) तथा दृढ़ (firm) दोनों प्रकार की होती है।
 
=== तरल पदार्थ ===
ऊतकों में तरल पदार्थ भी होते हैं, जिनमें रक्त और लसीका (lymph) मुख्य हैं। ये दोनों आशयों (vesicles) अथवा नलिकाओं (tubules) से होकर प्रवाहित होते हैं। ऊतक तरल (tissue fluid) कोशिकाओं को तर रखता है। अधातु के ही कारण शरीर का स्वरूप (Form) बना रहता है। जंतु का शरीर वस्तुत: और कुछ नहीं, अपितु अंत: कोशिकीय पदार्थ अथवा आधातृ का महल मात्र है, जिसमें अनेक रंग रूप और आकार प्रकार की अरबों कोशिकाओं की ईटें चुनी होती हैं। ये कोशिकाएँ अपने उत्पादों का आदान प्रदान करती हुई अपना जीवन व्यतीत करती रहती हैं।
 
ऊतक विज्ञान शरीर के अंगतंत्रों की भी सम्यक्‌ जानकारी देता है। अंगतंत्रों की सरंचना, रासायनिक प्रकृति एवं कार्यविधियों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए ऊतक विज्ञान का सहारा लेना पड़ता है।
 
== इन्हें भी देखें ==
* [[सूक्ष्म ऊतक विज्ञान]] या सूक्ष्मोतिकी (microhistology)
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.ihcworld.com/protocol_database.htm Histology Protocols]
* [http://www.kumc.edu/instruction/medicine/anatomy/histoweb Histoweb]
74,334

सम्पादन