"कुंतक" के अवतरणों में अंतर

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कविकर्म की कुशलता का नाम है वैदग्ध्य या विदग्धता। भंगी का अर्थ है - विच्छित, चमत्कार या चारुता। भणिति से तात्पर्य है - कथन प्रकार। इस प्रकार वक्रोक्ति का अभिप्राय है कविकर्म की कुशलता से उत्पन्न होनेवाले चमत्कार के ऊपर आश्रित रहनेवाला कथनप्रकार। कुंतक का सर्वाधिक आग्रह कविकौशल या कविव्यापार पर है अर्थात् इनकी दृष्टि में काव्य कवि के प्रतिभाव्यापार का सद्य:प्रसूत फल हैं।
 
== इन्हें भी देखें ==
* [[वक्रोक्तिजीवित]]
* [[महिम भट्ट]]
* [[वक्रोक्ति सिद्धान्त]]
 
== सन्दर्भ ग्रन्थ ==
* आचार्य विश्वेश्वर: हिंदी वक्रोक्ति जीवित, दिल्ली, 1957;
* बलदेव उपाध्याय : भारतीय साहित्यशास्त्र, भाग 2, काशी, सं. 2012;
* सुशीलकुमार दे: वक्रोक्तिजीवित का संस्करण तथा ग्रंथ की भूमिका, कलकत्ता
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{citation | year=2007 | chapter=''Midnight's Children'' in the Light of ''Vakrokti'' | author=Ajai Sharma | title = New perspectives on indian english writing | editor1=Malti Agrawal | publisher=Atlantic Publishers & Distributors | isbn=978-81-269-0689-5 | page=198 | url=http://books.google.com/books?id=Zt7OOLEqo7AC&pg=PA198&dq=kuntaka}}
* [http://www.sub.uni-goettingen.de/ebene_1/fiindolo/gretil/1_sanskr/5_poetry/1_alam/kunvjivu.htm Kuntaka's Vakroktijivika with Kuntaka's own commentary] at [[GRETIL]]
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