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परवर्ती प्राचीन सांस्कृतिक काल में, एथेंस, ठेबेस और फारस के साथ-साथ स्पार्टा अपना वर्चस्व बनाने के लिए एक-दूसरे के खिलाफ लड़ने में प्रमुख शक्तियां रहीं. पेलोपोन्नेसिंयन युद्ध के परिणामस्वरूप, स्पार्टा परंपरागत तौर पर महाद्वीपीय संस्कृति, वाला होकर भी एक नैसैनिक शक्ति बन गया. अपनी शक्ति के शिखर पर पहुंचकर स्पार्टा ने कई प्रमुख यूनानी राज्यों को अपने अधीन कर लिया और यहां तक कि अभिजात एथेनियन नौवाहिनी पर भी अपना कब्जा जमाने में कामयाब रहा. 5वीं सदी ईसा पूर्व के अंत तक यह एक राज्य के रूप में ऊपर उठकर सामने आया जिसने एथेनियन साम्राज्य को परास्त किया और अनातोलिया के फारसी प्रान्तों पर आक्रमण किया. यह एक ऐसी अवधि थी जिसमें स्पार्टन आधिपत्य ने अपनी छाप छोड़ी है.
 
कॉरींथियन युद्ध के दौरान स्पार्टा को महत्वपूर्ण यूनानी राज्यों, थेबेस एन्थेंस, कॉरिन्थ एवं आर्गोस के प्रमुख गठबंधन का सामना करना पड़ा. शुरू-शुरू में इस गठबंधन को फारस का समर्थन प्राप्त हुआ, अनातोलिया में जिसकी भूमि पर स्पार्टा द्वारा आक्रमण किया जा चुका था और जिसे एशिया में स्पार्टा के और आगे के विस्तार का भय भी था. स्पार्टा को एक के बाद एक जमीनी लड़ाइयों में जीत हासिल होती रही, लेकिन किराए पर लिए गए जहाजी-बेड़ों के द्वारा जिसे फारस ने एथेंस को मुहैया कराया था, नाइड्स (Cnidus) के युद्ध में इसके कई जलयान नस्त कर दिए गए. इस घटना ने स्पार्टा की नौसैनिक शक्ति को काफी क्षति पहुंचाई लेकिन फारस पर आगे भी आक्रमण करने की इसकी आकांक्षा को तबतक समाप्त न कर सका जबतक कि एथेनियन सेनाप्रधान (कोनोन) ने स्पार्टा की समुद्री तटवर्ती सीमा को तबाह न कर दिया तथा बूढ़े स्पार्टन के मन में हेलौट विद्रोह के भय को उकसा दिया.
 
387 ई.पू. की लड़ाई के और कई वर्षों बाद अंटाल्सैड्ल की शान्ति (Peace of Antalcidas) कायम हुआ, जिसके अनुसार लोनिया के सभी यूनानी नगर पुनः फारस के कब्जे में हो जाएंगे और फारस की एशियाई सीमा स्पार्टन आक्रमण की आशंका से मुक्त हो जाएगी. युद्ध के प्रभाव-स्वरूप (फारस की योग्यता) यूनानी राजनीति में सफलतापूर्वक हस्तक्षेप करने की फारस की क्षमता की पुनर्पुष्टि थी तथा यूनानी राजनीतिक प्रणाली में स्पार्टा की प्रधानता वाली स्थिति को भी निश्चयतापूर्वक स्वीकार करना था. लियुकट्रा के युद्ध (Battle of Leuctra) में थेबेस इपामिनॉनडॉस के हाथों भयानक सैन्य पराजय के पश्चात स्पार्टा दीर्घावधि के लिए पतन की ओर उन्मुख हो गया. यह पहली बार था कि स्पार्टन सेना स्थल-युद्ध में पूरी तरह परास्त हो गई.
371 ई.पू. में लियुकट्रा की लड़ाई एवं तत्पश्चात हेलोट विद्रोह में सपार्टन्स को जो क्षति सहनी पड़ी उससे स्पार्टा कभी भी उबर नहीं पाया. बहरहाल दो शताब्दियों से भी अधिक समय तक एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में अपने आपको बरकरार बनाने रखने में यह कामयाब रहा. न ही फिलिप द्वितीय ने और न ही उसके बेटे सिकंदर महान ने ही खुद स्पार्टा पर विजय प्राप्त करने की कोशिश की: स्पार्टन की सामरिक निपुणता अब भी इस हद तक अच्छी थी किसी भी हमले को संभवतः काफी नुकसान का जोखिम उठाना पड़ सकता था.
 
पूरब के सिकंदर के अभियान के दौरान, स्पार्टा के राजा, एजिस III ने 333 ईसापूर्व में क्रेट में इस उद्देश्य से सेना-वाहिनी भेजी कि स्पार्टा के लिए द्वीप पर कब्ज़ा कर लिया जाएगा. अब की बार मेसेडॉन के खिलाफ एजिस ने संयुक्त यूनानी सेना की कमान स्वयं संभाली और 331 ई.पू. में मेगालोपॉलिस (Megalopolis) की नाकाबंदी में घिर जाने से पहले शुरूआती सफलताएं भी हासिल की. सेनापति एंटीपेटर (Antipater) के नेतृत्व में एक विशाल मैसिडॉनियन सेना-वाहिनी ने राहत पहुंचाने के मकसद से कुच किया और स्पार्टन की नेतृत्व वाली सेना को जोरदार कांटे की लड़ाई में पराजित किया. 5300 से भी अधिक स्पार्टन्स एवं उसके सहयोगी इस संग्राम में मारे गए तथा एंटीपेटर की 3500 सैनिकों की टुकड़ी भी मरने वालों में शामिल थी. एजिस, जो अब घायल हो चुका था तथा खड़े होने में असमर्थ था, ने अपने लोगों को आदेश दिया कि वे उसे पीछे छोड़कर आगे बढ़ती हुई, मैसिडॉनियन सेना का सामना करें ताकि पीछे हटने के लिए उसे उनसे थोड़ी मुहलत मिल जाय. और अंत में भाले से मारे जाने से पहले, स्पार्टा के राजा ने अपने घुटनों के बल खड़े होकर ही शत्रु के कई सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया.
 
यहां तक कि अपने पतन के दौरान भी, स्पार्टा ने "हेलेनिज्म का रक्षक" होने एवं लैकोनिक को तीक्षण बुद्धि अपने दावे को कभी भुला नहीं. इस संदर्भ में एक उपाख्यान है कि जब फिलिप द्वितीय ने स्पार्टा को एक सन्देश में यह कह भेजा कि "अगर मैं लौकिनिया में प्रवेश कर जाता हूं तो मैं स्पार्टा को परास्त कर मिट्टी में मिला दूंगा," स्पार्टन्स ने इसके जवाब में सिर्फ एक शब्द कहा: "अगर".
 
जब फिलिप ने फारस के खिलाफ यूनान के एकीकरण के बहाने यूनानियों का संघ (लीग) बनाया, स्पार्टन्स ने उसमें शामिल नहीं होना चाहा - अखिल यूनानी अभियान में शामिल होने की उनकी कोई दिलचस्पी थी ही नहीं अगर यह स्पार्टन नेतृत्व के अंतर्गत नहीं होता है तो. हेरोडोटस के अनुसार मैसिडोनियंस डोरियन वंश के लोग थे जो स्पार्टन्स के ही सजातीय थे, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था. इस प्रकार फारस पर विजय प्राप्त करने के बाद सिकंदर महान ने एथेन्स को फारसी कवच वाले 300 सूट भेजे जिसके साथ यह शिलालेख भी था, "फिलिप का पुत्र सिकंदर एवं सभी यूनानी स्पार्टन को छोड़कर एशिया के रहने वाले विदेशियों से ली गई यह भेंट पेश करता है [अतिरीक्त महत्त्व दिया गया]".
 
प्युनिक युद्धों के दौरान स्पार्टा रोमन गणराज्य का चित्र राज्य (सहयोगी) था. अंततः स्पार्टा की राजनीतिक स्वाधीनता समाप्त कर दी गई ज्योहीं इसे एचियन लीग में शामिल हो जाने के लिए मजबूर कर दिया गया. 146 ई.पू. रोमन जेनरल लुसियस म्युमियस द्वारा यूनान पर जीत हासिल कर ली गई थी. रोमन विजय के दौरान स्पार्टन्स ने अपनी जीवन-यात्रा जारी रखी, तथा उनका नगर रोमन संभ्रांतों के लिए पर्यटक का आकर्षण बन गया जो मोहक स्पार्ती रीति-रिवाजों को करीब से देखने आया करते थे. ऐसा मानना है कि, एड्रियानोपल के युद्ध (378 ई.पू) में रोमन साम्राज्य की सेना पर जो तबाही बरपा हुई उसके साथ ही साथ, स्पार्टन सैनिकों के एवं जत्थे ने विसिगोथ्स पर चढ़ाई कर रही सेना को युद्ध में परस्त कर दिया.
डोरिक क्रेटन्स की नक़ल करते हुए स्पार्टा के डोरिक राज्य ने एक मिलाजुला सरकारी राज्य विकसित किया. यह राज्य एजियाड (Agiad) और यूरोपौन्टीड्स (Eurypontids) के परिवारों कें दो वंशानुगत राजाओं द्वारा प्रशासित होता था, कथित रूप से दोनों ही हेराक्लिस के उत्तराधिकारी थे और दोनों के ही अधिकार एक सामान थे, ताकि उनमें से कोई एक अपने सहयोगी के खिलाफ निषेधाधिकार की कार्यवाई न कर सके. नागरिकों की विधानसभा द्वारा प्रयोग की जाने वाली सत्ता की ताकत का स्रोत मूल वस्तुतः अज्ञात है क्योंकि ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण का अभाव और स्पार्टन राज्य की गोपनीयता इसके पीछे कारण हैं.
 
राजाओं के कर्तव्य प्रारंभिक तौर पर धार्मिक, न्यायिक और सामरिक हुआ करते थे. वे राज्य के प्रधान पुरोहित तो थे ही और डेल्फियन अभयारण्य के साथ संचार-व्यवस्था भी बनाए रखते थे, जो स्पार्टन राजनीति में हमेशा अपने अधिकार का पूरा प्रयोग करता था. हेरोडोटस के काल में (लगभग 450 ई.पू.), उनके न्यायिक कार्यकालयों पर उत्तराधिकार, दत्तक-ग्रहण तथा सार्वजनिक सड़कों जनित मामलों में प्रतिबन्ध था. दीवानी और आपराधिक मामलों के फैसले इफॉर्स के रूप में माने जाने वाले अधिकारीयों के एक वर्ग के साथ ही साथ गेरुसिया कहलाने वाली वयोवृद्धों की परिषद् द्वारा किए जाते थे. गेरुसिया में 28 वयोवृस्द शामिल होते थे जिनकी उम्र 60 साल से ऊपर की होती थी, आजीवन सदस्यता के लिए निर्वाचित होते थे और आमतौर पर राजघरानों एवं दो राजाओं के हिस्से हुआ करते थे. राज्य के उच्चस्तरीय नीतिगत फैसलों पर इस परिषद् द्वारा विचार-विमर्श किया जाता था जो तब कहीं जाकर दामोस के विकल्प में कार्यवाई का प्रस्ताव पेश कर सकता था. दामोस स्पार्टन नागरिकों का सामूहिक अंग था जो मताधिकार के माध्यम से विकल्पों में से किसी एक का चुनाव कर सकता था.
 
अरस्तू ने स्पार्टा के राजतंत्र का वर्णन "एक प्रकार का असीमित एवं सतत सेनापतित्व" के रूप में किया है. (Pol. iii. I285a), जबकि सुकरात ने स्पार्टन को "अन्दर से कुलीनत्तंत्र के अधीन से लेकर अभियान के संचालन तब राजतंत्र" (iii 24) के रूप में संदर्भित किया है. हालांकि, यहां भी समयान्तराल से राजकीय विशेषाधिकारों में कटौती कर दी गई. फारसी युद्धों के समय से ही, राजा ने युद्ध की घोषणा करने का अधिकार खो दिया एवं पर्यवेक्षी अधिकारों के साथ दो मजिस्ट्रेट (इफोर्स) राजा पर नजर रखने के लिए रणक्षेत्र में साथ भेज दिए जाते थे. विदेश नीति के नियंत्रण में भी मनोनीत मजिस्ट्रेट (इफोर्स) द्वारा उसे पदस्वलित कर दिया जाता था.
 
=== विवाह ===
क्रिप्तिया (Krypteia)पूरा करने के बाद, स्पार्ती पुरुषों को 30 वर्ष की उम्र में विवाह करना जरुरी हो जाता था. प्लूटार्क की रिपोर्ट के मुताबिक़ स्पार्टन की शादी की रात के कुछ अजीबोगरीब रीति-रिवाज जुड़े हुए हैं:<blockquote>विवाह के लिए औरतों पर कब्ज़ा करने की प्रथा थी (...) कब्ज़ा की गई लड़की का भार तथाकथित दुल्हन की सहेली ले लेती थी. सबसे पहले वह उसकी खोपड़ी की हज़ामत कर देती थी, तब उसे पुरुष के वस्त्र और सैंडल पहनकर अँधेरे में एक गद्दे पर लिटा देती थी. दूल्हा - जो नशे में नहीं रहता था और इसीलिए नपुंसक भी नहीं रहता था, पर हमेशा की तरह सौम्य और शांत बना रहता था - सर्वप्रथम मेस (भोजनालयों) में रात्री-कालीन भोजन ग्रहण करता था, तब चुपके से अन्दर प्रवेश करता था, उसके कमर बंद खोलता था, उसे बाहों में उठाता था और उसे बिस्तर पर ले जाता था.</blockquote> विवाह के बाद पति चोरी-छुपे अपनी पत्नी से मिलना-जुलना जारी रखता था. ये रीति-रिवाज़, जो स्पार्तियों के लिए अनोखे थे, इन्हें विभिन्न तरीकों से व्याख्यायित किया गया है. "अपहरण" हो सकता है बुरी नज़रों से बचने का एक तरीका भी हो, और पत्नी के केश कटवाना, शायद संस्कार का एक मार्ग हो जो उसकी नई जिन्दगी में प्रवेश-द्वार का एक संकेत मात्र हो.
 
== महिलाओं की भूमिका ==
वर्ष 1904 में, एथेंस में स्थित ब्रिटिश स्कूल ने लैकोनिया का आद्योपांत अन्वेषण आरंभ किया और आने वाले वर्ष में थेलामी, गेरोंथ्रे तथा मोनेमवासिया के निकट एंजेलोना में खुदाइयां की गई. वर्ष 1906 में, स्पार्टा में खुदाइयां शुरू की गई.
 
लीक (Leake) के द्वारा वर्णित एक छोटे से सर्कस से यह प्रमाणित होता है कि थियेटर जैसी ही इमारत वेदी के चतुर्दिक और आर्टेमिस ओर्थिया (Artemis Orthia) के मंदिर के सामने ईसवीं सन 200 के शीघ्र बाद निर्मित हुई. यहां संगीत और जिमनास्टिक की प्रतियोगिताएं आयोजित होने के साथ ही साथ प्रसिद्ध शारीरिक प्रताड़ना की कठोर परीक्षा (diamastigosis) से होकर गुजरना पड़ता था. मंदिर, जिसका निर्माण-काल दूसरी सदी ईसापूर्व के आसपास माना जा सकता है, वह छठी सदी के एक प्राचीन मंदिर की आधार शिला पर खड़ा है और इसके करीब ही बगल में और भी एक प्राचीन मंदिर के अवशेष मिलें हैं, जो 9वीं अथवा 10वीं सदी के समय के माने जा सकते हैं. मिट्टी के बर्तनों में मन्नत के चढ़ावे, कहरुबा (अम्बर), कांसा, हाथी के दांत, एवं सीसा सीमित क्षेत्र के अंतर्गत ही प्रचुरता में पाए गए हैं, जिनका काल 9वीं से 4वीं शताब्दियां ईसापूर्व माना गया है, जो आरंभिक स्पार्टन कला के अमूल्य साक्ष्य की आपूर्ति करते हैं.
 
वर्ष 1907 में, "ब्राज़ेन हाउस के" एथेना का अभयारण्य (Chalkioikos) को थिएटर के ठीक ऊपर बने एक्रोपॉलिश पर अवस्थित पाया गया और यद्यपि वास्तविक मंदिर संपूर्ण रूप से विनष्ट हो चुका है, इस क्षेत्र ने लैकोनिया के पुराकालीन शिलालेखों के दीर्घतम प्रसार प्रस्तुत किए हैं जिसमें कांसे की कीले एवं तश्तरियां तथा काफी संख्या में मन्नत के चढ़ावे पाए गए हैं. यूनानी नगर की दीवार, जिसका निर्माण 4थी से 2री सदी के बीच क्रमशः कई चरणों में हुआ था, अपने सर्किट के एक बड़े भाग के कारण खोज में पाया गया, जिसका मापांकन 48 स्टेड्स या 10 किलोमीटर किया गया. (Polyb. 1X. 21). अंतिम कालीन रोमन दीवार, लघुनगर के चतुर्दिक बना, जो संभवतः वर्ष 262 के गॉथिक आक्रमण के बाद के वर्षों के समय में निर्मित हुई होगी, की भी खोज की गई. वास्तविक भवनों की खोज के अलावे, पावसेनिया (Pausanias)के विवरण के आधार पर, स्पार्टन स्थलाकृति विज्ञान के साधारण अध्ययन में कई विन्दु अवस्थित हैं जिनका मानचित्रण किया गया. खुदाइयों से यह पता चला कि माइसेनियन कला का शहर युरोटास नदी के बाएं तट पर स्पार्टा से थोड़े दक्षिण-पूर्व में अवस्थित था. भूमि की व्यवस्था मोटे तौर पर आकार में त्रिकोणीय थी, जिसका ऊपरी हिस्सा उत्तर की ओर निकला हुआ था. इसका क्षेत्रफल अनुमानतः "नए" स्पार्टा के क्षेत्रफल के सामने था लेकिन अनाच्छादान ने इसके भवनों पर तबाही बरपा कर दी है और नींवों के अवशेष तथा टूटे-फूटे बर्तनों के टुकड़ों के अलावे कुछ भी नहीं बचे.
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