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[[बज्जिका]] के मानक [[शब्दकोश]] का अच्छा विकास नहीं हुआ है। कुछ वर्ष पूर्व लेखक सुरेन्द्र मोहन प्रसाद द्वारा संपादित तथा अखिल भारतीय बज्जिका साहित्य सम्मेलन, [[मुजफ्फरपुर]] द्वारा सन २००० में प्रकाशित '''बज्जिका - हिन्दी शब्दकोष''' उपलब्ध है।
 
बज्जिका की शब्दावली को मुख्यतः तीन वर्गों में रखा जा सकता है-
'''[[तद्भव]] शब्द'''-- ये वैसे शब्द हैं जिनका जन्म [[संस्कृत]] या [[प्राकृत]] में हुआ था, लेकिन उनमें काफ़ी बदलाव आया है। जैसे- भतार (भर्तार से), चिक्कन (चिक्कण से), आग (अग्नि से), दूध (दुग्ध से), दाँत (दंत से), मुँह (मुखम से)। तत्सम शब्द (संस्कृत से बिना कोई रूप बदले आनेवाले शब्द) का बज्जिका में प्रायः अभाव है। हिंदी और बज्जिका की सीमा रेखा चूँकि क्षीण है इसलिए हिंदी में प्रयुक्त होनेवाले तत्सम शब्द का प्रयोग बज्जिका में भी देखा जा सकता है।
 
'''[[देशज]] शब्द'''--बज्जिका में प्रयुक्त होने वाले '''देशज''' शब्द लुप्तप्राय हैं। इसके सबसे अधिक उपयोगकर्ता गाँव में रहने वाले निरक्षर या किसान हैं। ''देशज'' का अर्थ है - जो देश में ही जन्मा हो। जो न तो विदेशी है और न किसी दूसरी भाषा के शब्द से बना हो। ऐसा शब्द जो स्थानीय लोगों ने बोल-चाल में यों ही बना लिया गया हो। बज्जिका में ऐसे शब्दों को देशज के बजाय "मूल शब्द" भी कहा जा सकता है, जैसे- पन्नी (पॉलिथीन), फटफटिया (मोटर सायकिल), घुच्ची (छेद) आदि।
 
'''[[विदेशज]] शब्द''' हिन्दी के समान बज्जिका में भी कई शब्द [[अरबी]], [[फ़ारसी]], [[तुर्की]], [[अंग्रेज़ी]] आदि भाषा से भी आये हैं, इन्हें विदेशज शब्द कह सकते हैं। वास्तव में बज्जिका में प्रयोग होने वाले विदेशज शब्द का तद्भव रुप ही प्रचलित है, जैसे-कौलेज, लफुआ (लोफर), टीशन (स्टेशन), गुलकोंच(ग्लूकोज़), सुर्खुरू (चमकते चेहरे वाला) आदि।
'''विशेषण''' जैसे- लिच्चर (कंजूस एवं कपटी स्वभाव वाला), ख़चड़ा या खच्चड़ (बदमाश), ढ़हलेल (बेवकूफ), लतखोर (बार-बार गलती करने वाला), बकलेल(बेवकूफ), बुड़बक(निरा बेवकूफ), भितरघुन्ना (कम बोलने और ज्यादा सोचने वाला), साँवर (साँवला), गोर (गौरवर्ण), लफुआ (लोफर), पतरसुक्खा (दुबला-पतला आदमी), चमड़चिट्ट (पीछा न छोडनेवाला), थेथड़ (बार-बार गलती करने वाला), गोरकी (गोरी लड़की), पतरकी (दुबली लड़की) आदि।
 
'''क्रियाएँ''' जैसे- अकबकाना (चौंकना), टरकाना (टालमटोल), कीनना (ख़रीदना), खिसियाना (गुस्सा करना), हँसोथना (जल्दी समेटना), भमोर लेना (मुँह से काट लेना), बकोटना (नाखून से नोंचना), लबड़-लबड़ (जल्दी जल्दी बात बनाना), ढ़ूंकना (प्रवेश करना), खिसियाना (गुस्सा करना), भुतलाना (खो जाना), बीगना (फेंकना), गोंतना (पानी में डुबाना), धड़फड़ाना (जल्दी के चक्कर में गिर जाना), मेहराना (नम होना), सरियाना (सँवारना), चपोड़ना (रोटी में घी उड़ेलना), सुतल (सोया हुआ), देखलिअई (देखा), बजाड़ना (पटकना), टटाना (दर्द करना), तीतना (भींग जाना), बियाना (पैदा होना), पोसना (लालन-पालन करना) आदि।
 
'''संबंधवाचक शब्द''': भतार (पति), जनानी (औरत/पत्नी), मेहरारू (बीवी), मरद (आदमी/ पति), मौगी (पराई औरत), धिया (बेटी), जईधी (बड़ी बहन की बेटी), कनियां (बहू/ नई दुल्हन), पुतोह (पतोहू), गोतनी (पति के भाई की पत्नी), देओर-भौजाई (देवर एवं भाभी), भाभो (भावज), भैंसुर (पति का बड़ा भाई), लौंडा (सयाना लड़का/समलीगिक), छौंड़ा एवं छौड़ी(लड़का एवं लड़की), आदि।
 
'''खान-पान संबंधी शब्द''': मिट्ठा (गुड़), नून (नमक), बूँट (चना), भात (चावल), सतुआ, मुड़ई (मूली), अलुआ (एक प्रकार का कंद), ऊंक्खी (ईख), रमतोरई (भिंडी), कोंहरा, झिंगुनी, कचड़ी (एक नमकीन), ठेकुआ (एक प्रकार का मीठा पकवान), पुरुकिया (गुझिया), कसार (चावल एवं चीनी से बना मिष्टान्न), गरी (नारियल का कोपरा), तरकारी (सब्जी), छुच्छा (बिना सब्जी के), जूठा, निरैठा (जो खाया नहीं गया हो), अज्जू (कच्चा फल), जुआईल (पका फल), चोखा (आग में पकाकर बनाई गई सब्जी), भरता (भुर्ता) आदि।
'''कृषि-कार्य संबंधी शब्द''': धूर, लग्गी, कट्ठा, बीघा (जमीन की पैमाईश के लिए बनी इकाई), सिराउर (हल जोतने के समय बनने वाली धारियाँ, सीता), क्यारी (जमीन का छोटा टुकड़ा), कदवा (धान के लिए खेत की तैयारी), बिच्चा (बिचड़ा), बाव (हल की सहायता से अनाज बोना), छिट्टा (छीटकर अनाज बोना), पटवन (सिंचाई), केरौनी (फसल से घास आदि निकालना), कटनी (फसल की कटाई), दौनी (तैयार फसल से अन्न निकालना), हर (हल), फार (फाल), पालो, जुआ, हेंगा (जमीन समतल करने के लिए), पैना (पतला डंडा), जाबी (जानवरों के मुँह बाँधने हेतु बनायी गयी जाली), जोर (जानवरों को बाँधने हेतु प्रयुक्त रस्सी), खूँटा, कुट्टी (महीन चारा), दर्रा या धोईन (जानवरों को दियाजाने वाला अन्नयुक्त पतला आहार), खरी (खल्ली), चुन्नी (अनाज का छिलका), गाछ या गाछी (पेड़), सोंड़ (मूल जड़), डांड़ (तना), बीया (बीज) आदि।
 
''' कुछ अन्य शब्द''' जैसे- भिन्सारा (सुबह), अन्हार (अंधेरा), इंजोर (प्रकाश), ओसारा (बरामदा), अनठेकानी (बिना अनुमान के), तनीयक (थोड़ा), निम्मन (अच्छा/स्वादिष्ट), अउँघी (नींद), बहिर (बधिर), भकचोंधर, अखनिए (अभी), तखनिए(तभी), माथा (दिमाग), फैट (मुक्का), लूड़् (कला), गोईंठा, डेकची, फटफटिया (मोटरसायकिल), नूआ (साड़ी), अक्खटल (नहीं मानने योग्य), भुईयां (जमीन), गोर (पैर) आदि।
 
'''गिनती/ संख्यावाचक/ मात्रात्मक शब्द''' एक, दू, तीन, चार, पाँच, छौ, सात, आठ, नौ, दस आदि। अंजुरी (हाथ के दोने में समाने लायक), सेर (लगभग ९०० ग्राम), पसेरी (५ सेर), मन (४० सेर), कट्टा (लगभग २५ सेर), कुंटल (क्विंटल, १०० किलो), बित्ता (अंगूठे से कनिष्ठा के छोड़ तक), डेग (पग भर), कोस (लगभग डेढ किलोमीटर की दूरी) आदि।
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