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इनमें अंबुड्समान नामक संस्था ने प्रशासन के प्रहरी बने रहने में अंतर्राष्ट्रीय सफलता प्राप्त की है. स्वीडन को इस बात का श्रेय है. वहां वर्ष 1713 में किंग चाल्र्स बारहवें ने अपने एक सभासद को उन अधिकारियों को दंडित करने के लिए नियुक्त किया जो कानून का उल्लंघन करते थे. स्वीडन में नया संविधान बनने पर संविधान सभा के सदस्यों ने जिद की कि उनका ही एक अधिकारी जांच का कार्य करेगा. वह सरकारी अधिकारी नहीं हो सकता. तब 1809 में स्वीडन के संविधान में अंबुड्समान की व्यवस्था हुई जो अदालतों और लोकसेवकों द्वारा कानूनों तथा विनियमों के उल्लंघन के प्रकरण की जांच करेगा.
 
== इतिहास ==
[[भ्रष्टाचार]] राष्ट्र का [[कोढ़]] है। भ्रष्टाचार प्रशासन की एक प्रमुख समस्या बन गया है। भ्रष्टाचार को मिटाने और दूर करने के लिए विभिन्न देशों में समय-समय पर अनेक कदम उठाये गये है। [[स्वीडन]] में सर्वप्रथम 1809 में संविधान के अन्तर्गत 'ओम्बुड्समैन' की स्थापना की गयी। [[भारत]] में आम्बुड्समैन को लोकपाल के नाम से जाना जाता है। [[फिनलैण्ड]] में 1918में, डेनमार्क में 1954में, नार्वे में 1961 में व [[ब्रिटेन]] में 1967में ओम्बुड्समैन (लोकपाल) की स्थापना भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए की गई। विभिन्न देशों में ओम्बुड्स को विभिन्न नामों से जाना जाता है। इंगलैण्ड में इसे संसदीय आयुक्त, सेवियत संघ में ‘वक्ता‘ अथवा प्रोसिक्युटर व डेनमार्क एंव न्युजीलैण्ड में इंगलैण्ड की तरह संसदीय आयुक्त के नाम से जानते है एवं भारत में इसे लोकपाल के नाम से जाना जाता है।
 
विदेशों में प्राप्त लोकपाल के कार्यक्षेत्र में आने वाले अधिकारियों , मंत्रियों आदि के बारे में ज्ञान प्राप्त करके भारत में भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए विभिन्न अधिकारियों को इसके दायरे में लाना चाहिए। स्वीडन के लोकपाल के जांच के दायरे में असैनिक प्रशासकीय कर्मचारियों के अलावा न्यायाधीशों तथा पादरियों को भी रखा गया है किन्तु मन्त्रीगण उनके क्षेत्राधिकार से बाहर होते है ताकि संसदीय उत्तरदायित्व विभाजित न हो जाए। डेनमार्क में लोकपाल मंत्रियों तथा लोक कर्मचारियों की तो जांच कर सकता है परन्तु न्यायाधीशों के कार्य और व्यवहार पर टिप्पड़ी नहीं कर सकता। न्यूजीलैण्ड में लोकपाल को मंत्री पर प्रत्यक्ष नियन्त्रण रखने का अधिकार नहीं है। विदेशी सम्बंध , अन्तर्देशीय राजस्व और प्रधानमंत्रीय विभाग भी उसके क्षेत्र के बाहर है। जबकि ब्रिटेन में लोकपाल की जांच के दायरे में सभी मंत्रालय , विभाग, सिविल सेवा आयोग , केन्द्रीय सूचना कार्यालय आदि आते हैं। विदेश सम्बन्ध , सुरक्षा , कर्मचारी प्रशासन , पुलिस क्रिया , निगम , सरकारी ठेके आदि को लोकपाल की जांच के दायरे से बाहर रखा गया है।
 
== इन्हें भी देखिये ==
* [[लोकायुक्त]]
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://raviwar.com/news/500_what-is-the-jan-lokpal-bill-kanak-tiwari.shtml क्या है जन लोकपाल] (रविवार)
* [http://hindi.webdunia.com/news/news/national/1006/27/1100627061_1.htm 40 साल से अटका पड़ा है लोकपाल विधेयक] (वेबदुनिया)
* [http://jagraneditorial.jagranjunction.com/2010/03/11/यही-संकल्प-लोकपाल-विधेयक/ यही संकल्प लोकपाल विधेयक पर क्यों नहीं] (दैनिक जागरण)
 
[[श्रेणी:भ्रष्टाचार]]
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