"बुद्धघोष" के अवतरणों में अंतर

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इस जीवनवृत्त में जो यह उल्लेख पाया जाता है कि बुद्धघोष राजा महानाम के शासनकाल में लंका पहुँचे थे, उससे उनके काल का निर्णय हो जाता है, क्योंकि महानाम का शासनकाल ई. की चौथी शती का प्रारंभिक भाग सुनिश्चित है। अतएव यही समय बुद्धघोष की रचनाओं का माना गया है। विसुद्धिमग्ग में अंत में उल्लेख है कि मोरंड खेटक निवासी बुद्धघोष ने बिसुद्धमग्ग की रचना की। उसी प्रकार मज्झिमनिकाय की अट्टकथा में उसके मयूर सुत्त पट्टण में रहते हुए बुद्धमित्र नामक स्थविर की प्रार्थना से लिखे जाने का उल्लेख मिलता है। अंगुत्तरनिकाय की अट्टकथाओं में उल्लेख है कि उन्होंने उसे स्थविर ज्योतिपालकी प्रार्थना से कांचीपुर आदि स्थानों में रहते हुए लिखा। इन उल्लेखों से ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी अट्टकथाएँ लंका में नहीं,बल्कि भारत में, संभवत: दक्षिण प्रदेश में, लिखी गई थीं। कंबोडिया में एक बुद्धघोष विहार नामक अति प्राचीन संस्थान है, तथा वहाँ के लागों का विश्वास है कि वहीं पर उनका निर्वाण हुआ था और उसी स्मृति में वह बिहार बना।
 
== रचनाएँ ==
बुद्धघोष द्वारा रचित माने जानेवाले ग्रंथ निम्न प्रकार हैं :
 
1. बिसुद्धिमग्ग में संयुक्त निकाय की "अंतो जटा" आदि दो गाथाओं की व्याख्या दार्शनिक रूप से की गई है। इस ग्रंथ की बौद्ध संप्रदाय में बड़ी प्रतिष्ठा है।
 
2. सामंत पासादिका - विनयपिटक की अट्टकथा,
 
3. कंखावितरणी - विनयपिटक के एक खंड पातिमोक्ख की अट्टकथा,
 
4. सुमंगलविलासिनी - दीघनिकाय की अट्टकथा,
 
5. पपंचसूदनी - मज्झिमनिकाय की अट्टकथा,
 
6. सारत्थपकासिनी - संयुत्तनिकाय अट्ठकथा,
 
7. मनोरथजोतिका - अंगुत्तरनिकाय की अट्ठकथा,
 
8. परमत्थजोतिका - खुद्दकनिकाय के खुद्दकपाठ एवं सुत्तनिपात की अट्टकथा,
 
9. धम्मपद-अट्टकथा,
 
10. जातक-अट्ठवण्णना,
 
11. अट्ठशालिनी-अभिधम्मपिटक के धम्मसंगणि की अट्ठकथा,
 
12. संमोहविनोदनी-विभंग की अट्टकथा,
 
13. पंचप्पकरण अट्ठकथा - अभिधम्मपिटक के कथावत्थु, पुग्गल पण्णति, धातुकथा, यमक और पट्ठाण इन पाँच खंडों पर की टीका है।
 
इस प्रकार बुद्धघोष ने पालि में सर्वप्रथम अट्ठकथाओं की रचना की है। पालि त्रिपिटक के जिस अंशों पर उन्होंने अट्ठकथाएँ नहीं लिखी थी, उनपर बुद्धदत्त और धर्मपाल ने तथा आनंद आदि अन्य भिक्षुओं ने अट्ठकथाएँ लिखकर पालि त्रिपिटक के विस्तृत व्याख्यान का कार्य पूरा किया।
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.prabhatkhabar.com/node/114934 बौद्ध साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं बुद्धघोष] (प्रभात खबर)
 
[[श्रेणी:पालि साहित्यकार]]
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