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जब किसी बड़े [[अधिकारी]] या प्रशासक पर विधानमंडल के समक्ष अपराध का दोषारोपण होता है तो इसे '''महाभियोग''' (Impeachment) कहा जाता है। [[इंग्लैड]] में राजकीय परिषद क्यूरिया रेजिस के न्यासत्व अधिकार द्वारा ही इस प्रक्रिया का जन्म हुआ। समयोपरांत जब क्यूरिया या पार्लिमेंट का हाउस आफ लार्ड्स तथा हाउस ऑ कामंस, इन दो भागों में विभाजन हुआ तो यह अभियोगाधिकार हाउस ऑव लार्ड्स को प्राप्त हुआ। किंतु जब से (1700 ई) न्यायाधीशों एवं मंत्रियों के ऊपर अभियोग चलाने का रूप अन्य प्रकार से निर्धारित हो गया है, महाभियोग का प्रयोग समाप्तप्राय है। इंग्लैंड में कुछ महाभियोग इतने महत्वपूर्ण हुए हैं कि वे स्वयं इतिहास बन गए। उदाहरणार्थ 16वीं शताब्दी में [[वारेन हेस्टिंग्ज]] तथा लार्ड मेलविले (हेनरी उंडस) का महाभियोग सतत स्मरणीय है।
 
[[संयुक्त राष्ट्र अमरीका]] के संविधान के अनुसार उस देश के राष्ट्रपति, सहकारी राष्ट्रपति तथा अन्य सब राज्य पदाधिकारी अपने पद से तभी हटाए जा सकेंगे जब उनपर राजद्रोह, घूस तथा अन्य किसी प्रकार के विशेष दुराचारण का आरोप महाभियोग द्वारा सिद्ध हो जाए (धारा 2, अधिनियम 4)।। अमरीका के विभिन्न राज्यों में महाभियोग का स्वरूप और आधार भिन्न भिन्न रूप में हैं। प्रत्येक राज्य ने अपने कर्मचारियों के लिये महाभियोग संबंधी भिन्न भिन्न नियम बनाए हैं, किंतु नौ राज्यों में महाभियोग चलाने के लिये कोई कारण विशेष नहीं प्रतिपादित किए गए हैं अर्थात् किसी भी आधार पर महाभियोग चल सकता है। न्यूयार्क राज्य में 1613 ई में वहाँ के गवर्नर विलियम सुल्जर पर महाभियोग चलाकर उन्हें पदच्युत किया गया था और आश्चर्य की बात यह है कि अभियोग के कारण श्री सुल्जर के गवर्नर पद ग्रहण करने के पूर्व काल से संबंधित थे।
 
इंग्लैंड एवं अमरीका में महाभियोग क्रिया में एक अन्य मान्य अंतर है। इंग्लैंड में महाभियोग की पूर्ति के पश्चात् क्या दंड दिया जायेगा, इसकी कोई निश्चित सीमा नहीं, किंतु अमरीका में संविधानानुसार निश्चित है कि महाभियोग पूर्ण हो चुकने पर व्यक्ति को पदभ्रष्ट किया जा सकता है तथा यह भी निश्चित किया जा सकता है कि भविष्य में वह किसी गौरवयुक्त पद ग्रहण करने का अधिकारी न रहेगा। इसके अतिरिक्त और कोई दंड नहीं दिया जा सकता। यह अवश्य है कि महाभियोग के बाद भी व्यक्ति को देश की साधारण विधि के अनुसार न्यायालय से अपराध का दंड स्वीकार कर भोगना होता है।
[[भारतीय संविधान]] के अनुसार केवल राष्ट्रपति के ऊपर महाभियोग चल सकता है। किंतु यह तभी संभव हो सकता है जब यह निर्धारित हो जाय कि [[राष्ट्रपति]] ने संविधान के विरूद्ध कार्य किया है। राष्ट्रपति की महाभियोग-प्रणाली का रूप इतना जटिल और दुष्कर है कि उसकी पूर्ति की संभावना ही नहीं दिखती। अन्यथा राजनीति उद्देश्यों की पूर्ति के हेतु नित्य ही राष्ट्रपति पर महाभियोग द्वारा आक्रमण संभव हो जाता।
 
== संदर्भ ग्रन्थ ==
* इंसाइक्लोपीडिया ऑव सोशल साइंसेज;
* भारत संविधान;
* संयुक्त राष्ट्र अमरीका का संविधान;
* ला ऑव इंपीचमेंट इन दि यूनाइटेड स्टेट्स
 
== बाहरी कडियाँ ==
* [http://www.deshbandhu.co.in/newsdetail/2245/9/198 कैसा होता है महाभियोग]
* [http://haahaakar.blogspot.com/2010/04/blog-post_12.html जज, जस्टिस और भ्रष्टाचार ]
* [http://books.google.com/books?id=vKIpFE9oPSMC&pg=PA27&lpg=PA27&dq=attempted+Impeachment+of+William+O.+Douglas&source=bl&ots=q_xZir1oSr&sig=22gM6sj0jFIB3ZpeZ9QNmITxEv8&hl=en&ei=DpEdStWLFpmWMYHDzO4F&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=2 Gerhardt, Michael J. ''The federal impeachment process''.]
 
[[श्रेणी:विधि]]
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