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[[चित्र:Bubba Kush.jpg|right|thumb|250px|मादा भांग के पधे के फूल, आसपास की पत्तियों एवं तने को सुखाकर बनाया गया '''गांजा''']]
'''गांजा''' (Cannabis या marijuana), एक [[मादक पदार्थ]] (ड्रग) है जो [[भांगगाँजे का पौधा|गांजे के पौधे]] के पौधे से भिन्न-भिन्न विधियों से बनाया जाता है। इसका उपयोग [[मनोसक्रिय मादक]] (psychoactive drug) के रूप में किया जाता है। मादा भांग के पौधे के [[फूल]], आसपास की पत्तियाँ एवं तनों को सुखाकर बनने वाला गांजा सबसे सामान्य (कॉमन) है।
 
== गाँजे का पौधा ==
== परिचय ==
{{मुख्य|गाँजे का पौधा}}
गाँजा एक मादक द्रव्य है जो [[कैनाबिस सैटाइवा]] (Cannabis sativa Linn) नामक वनस्पति से प्राप्त होता है। यह मोरेसिई (Moreaceae) कुल के कनाब्वायडी समुदाय का पौधा है। यह मध्य एशिया का आदिनिवासी है, परंतु समशीतोष्ण एवं उष्ण कटिबंध के अनेक प्रदेशों में स्वयंजात अथवा कृषिजन्य रूपों में पाया जाता है। भारत में बीज की बोआई वर्षा ऋतु में की जाती है। गाँजे का क्षुप प्राय: एकलिंग, एकवर्षायु और अधिकतर चार से आठ फुट तक ऊँचा होता है। इसके कांड सीधे और कोणयुक्त, पत्तियाँ करतलाकार, तीन से आठ पत्रकों तक में विभक्त, पुष्प हरिताभ, नर पुष्पमंजरियाँ लंबी, नीचे लटकी हुई और रानी मंजरियाँ छोटी, पत्रकोणीय शुकिओं (Spikes) की होती हैं। फल गोलाई लिए लट्टु के आकार का और बीज जैसा होता है। पौधे गंधयुक्त, मृदुरोमावरण से ढके हुए और रेज़िन स्राव के कारण किंचित्‌ लसदार होते हैं। कैनाबिस के पौधों से गाँजा, चरस और भाँग, ये मादक और चिकित्सोपयोगी द्रव्य तथा फल, बीजतैल और हेंप (सन सदृश रेशा), ये उद्योगोपयोगी द्रव्य, प्राप्त किए जाते हैं।
 
गाँजा एक मादक द्रव्य है जो [[कैनाबिस सैटाइवा]] (Cannabis sativa Linn) नामक वनस्पति से प्राप्त होता है। यह मोरेसिई (Moreaceae) कुल के कनाब्वायडी समुदाय का पौधा है। यह मध्य एशिया का आदिनिवासी है, परंतु समशीतोष्ण एवं उष्ण कटिबंध के अनेक प्रदेशों में स्वयंजात अथवा कृषिजन्य रूपों में पाया जाता है। [[भारत]] में [[बीज]] की बोआई वर्षा ऋतु में की जाती है। गाँजे का क्षुप प्राय: एकलिंग, एकवर्षायु और अधिकतर चार से आठ फुट तक ऊँचा होता है। इसके कांड सीधे और कोणयुक्त, पत्तियाँ करतलाकार, तीन से आठ पत्रकों तक में विभक्त, पुष्प हरिताभ, नर पुष्पमंजरियाँ लंबी, नीचे लटकी हुई और रानी मंजरियाँ छोटी, पत्रकोणीय शुकिओं (Spikes) की होती हैं। फल गोलाई लिए लट्टु के आकार का और बीज जैसा होता है। पौधे गंधयुक्त, मृदुरोमावरण से ढके हुए और रेज़िन स्राव के कारण किंचित्‌ लसदार होते हैं। कैनाबिस के पौधों से गाँजा, चरस और भाँग, ये मादक और चिकित्सोपयोगी द्रव्य तथा फल, बीजतैल और हेंप (सन सदृश रेशा), ये उद्योगोपयोगी द्रव्य, प्राप्त किए जाते हैं।
 
कैनाबिस के पौधों से गाँजा, चरस और भाँग, ये मादक और चिकित्सोपयोगी द्रव्य तथा फल, बीजतैल और हेंप ([[सनई|सन]] सदृश रेशा), ये उद्योगोपयोगी द्रव्य, प्राप्त किए जाते हैं।
 
== गाँजा ==
== चरस ==
नारी पौधों से जो रालदार स्राव निकलता है उसी को हाथ से काछकर अथवा अन्य विधियों से संगृहीत किया जाता है। इसे ही चरस या सुल्फा कहते हैं। ताजा चरस गहरे रंग का और रखने पर भूरे रंग का हो जाता है। अच्छी किस्म के चरस में ४० प्रतिशत राल होती है। वायु के संपर्क में रखने से इसकी मादकता क्रमश: कम होती जाती है। रेज़िन स्राव पुष्पित अवस्था में कुछ पहले निकलना प्रारंभ होता है और गर्भाधान के बाद बंद हो जाता है। इसलिये गाँजा या चरस के खेतों से नर पौधों को छाँट छाँटकर निकाल दिया जाता है। प्राय: शीततर प्रदेशों में यह स्राव अधिक निकलता है। इसलिये चरस का आयात भारत में बाहर से प्राय: यारकंद से तिब्बत मार्ग द्वारा, होता रहा है।
मक्क्क्क्क्कग ग्फ ह्गद ह द्य्ग ह्हस्ग त्य्स ह्हस्य ह्हस त्घ्जुज्स ह्ह्फ्स ह्ह्व्फ्स य्य स ग्फ्ह्ग द्फ्युय य्य्द्र्म्बूब्फ य्य मु स्द न्बुह ब ब्य्य्त्द्भ्ज्द्त्ग ह्त्फ्फ्त्ग्.क्ष्ब फ्ग्रेह्फ्ग त्ग्फ्ग्व्त स्क्ष्ध्ग्फ्ग्त्क्ष ह्य्त्य्दुय्त एय्त क्ष्च द्ध्त्य्क्ष्ज्द्र उये ज्फ्य्ह्दुह्द ध्त्र्ह्द्स्ब युन्फ्च्फ्य्द उज्य्द्फ्ह्ज्ञ्य्त्फ्त्ग ह्ह्य्ह्च्ज्ग्च्फ ह्ग्फ न फ्ग्व्ह्ह फ्व्ज ह्च्ग्च्फ्ज्ज्ग न्क्ष्क्ष व्ह्क्ष्फ्घ्च्फ ह्फ्व्ज्क्ष्स्द्फ्ज्व ग्भ्ग्द्फ्न्वु उह्फ्त्ग्य्द्ज्ज्ग ज्ज्व्च्घ्फ्क्क्फ्द्ज द्ज्ष्द्स ज्ज्स्द्ब्ग ह्ग्फ्न्न्ब्ग्ब क्फ्भ्ग्ब्घ्न्ब ब्ग्च्द्द्व्ब्ग्ब्भ ब्ग्फ्ग्ब्ग्ग्फ्घ्ह्घ्ह ह्ह्व्ग्फ्द्ज ह्ज्द्ग्फ्ब्ब्ग्ब्ब्ग व्ग्?
 
== भाँग ==
 
== उपयोग ==
गाँजा और चरस का [[तंबाकू]] के साथ धूप्रपान के रूप में और भाँग का शक्कर आदि के साथ पेय अथवा तरह तरह के माजूमों (मधुर योगों) के रूप में प्राय: एशियावासियों द्वारा उपयोग होता है। उपर्युक्त तीनों मादक द्रव्यों का उपयोग चिकित्सा में भी उनके मनोल्लास-कारक एवं अवसादक गुणों के कारण प्राचीन समय से होता आया है। ये द्रव्य दीपन, पाचन, ग्राही, निद्राकर, कामोत्तेजक, वेदनानाशक और आक्षेपहर होते हैं। अत: पाचनविकृति, अतिसार, प्रवाहिका, काली खाँसी, अनिद्रा और आक्षेप में इनका उपयोग होता है। बाजीकर, शुक्रस्तंभ और मन:प्रसादकर होने के कारण कतिपय माजूमों के रूप में भाँग का उपयोग होता है। अतिशय और निरंतर सेवन से क्षुधानाश, अनिद्रा, दौर्बल्य और कामावसाद भी हो जाता है।
 
===फल और बीजतैल===
'''फल और बीजतैल''' - स्वयंजात पौधों से, फलों का संग्रह, मुर्गी आदि पालतू चिड़ियों को खिलाने के लिए होता है। इसे पेरने पर लगभग ३५ प्रतिशत हरतपीत तैल निकलता है, जिसका उपयोग प्राय: अलसी तैल के स्थान पर होता है।
 
== हेंप ==
यद्यपि 'हेंप' शब्द का व्यवहार कई जाति के पौधों से प्राप्त होनेवाले रेशों के लिए होता है, तथापि वास्तविक हेंप (true hemp) कैनाबिस के रेशे को ही कहते हैं। रेशे के लिये कैनाबिस की खेती यूरोप, अमरीका, चीन, जापान, भारत (अल्मोड़ा आदि के ऊँचे पहाड़ी भागों एवं ट्रावनकोर) और कुछ कुछ नेपाल में होती है। इसके लिये किंचित्‌ आर्द्र जलवायु और अच्छी दोमट मिट्टी चाहिए। नीचे की पत्तियों के गिरने और शाखाओं के पीले पड़ने पर खेत काटे जाते हैं। तनों को पानी (भारत) या ओस (यूरोप, अमरीका) में सड़ाकर रेशे पृथक किए जाते हैं। पुष्पितावस्था के ठीक पहले काटी हुई फसल से उत्तम रेशे निकलते हैं। श्वेत या तृणवर्ण के और अलसीसूत्र (linen) के सदृश चमकवाले सूत्र उत्तम पाने जाते हैं, सूत्र लंबाई में प्राय: ४० से ८० इंच तक बड़े, सूत्राग्र कुंठित, गोल और पृष्ठ असमतल होता है। जिन कोशों में ये बने होते हैं, वे प्राय: पौन इंच लंबे और २२ म्यू (म्यू=१/१,००० मिमी.) मोटे होते हैं। इनका कोषावरण सैजूलोज ओर लिग्नोसैलूलोज का बना होता है। हेंप सूत्रों का उपयोग पतली डोरियों, रस्से, पाल आदि के विशेष प्रकार के कपड़े और गलीचे बनाने में होता है। हेंप कांड का उपयोग मोटे किस्म का कागल बनाने में भी हो सकता है।
 
== इतिहास ==
 
== इन्हें भी देखें ==
* [[गाँजे का पौधा]]
* [[भांग]]
* [[हशीश]]