"पाणिनि" के अवतरणों में अंतर

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पाणिनि का कार्य 19वीं सदी में यूरोप में जाना जाने लगा, जिससे इसका आधुनिक भाषाशास्त्र पर खूब प्रभाव पड़ा। आरंभ में फ़्रेन्ज़ बोप् ने पाणिनि का अध्ययन किया। बाद में बहुत सी रचनाओं से योरपीय संस्कृत के विद्वान् जैसे फर्नांडीस डी सॉसर, लियोनार्ड ब्लूमफील्ड और रोमन जैकब्सन् आदि प्रभावित हुए। फ्रिट्स् स्टाल ने योरप में भाषा पर भारतीय विचारों के प्रभाव की विवेचना की।
===डी सॉसर्===
पाणिनि और बाद के भारतीय भाषाशास्त्री भर्तृहरि का फ़र्डीनांड डि सॉसर के कई बुनियादी विचारों पर काफ़ी प्रभाव पड़ा। फ़र्डीनांड डि सॉसर संस्कृत के प्राध्यापक थे, जो कि आधुनिक संरचनात्मक भाषाशास्त्र के जनक कहे जाते हैं। सॉसर ने स्वयं अपने कुछ विचारों पर भारतीय व्याकरण के प्रभाव का ज़िक्र किया है। अपने 1881 में प्रकाशित "डी लेम्पलोइ डु जेनिटिफ़् ऍब्सॉल्यु एन् सैन्स्क्रिट्" (संस्कृत में जेनेटिव् निरपेक्ष का प्रयोग) में, उन्होंने पाणिनि को विशेषरूप से ज़िक्र करके अपनी रचना को प्रभावित करने वाला बताया है।
 
 
===लियोनार्ड् ब्लूम्फ़ील्ड्===
 
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