"असमिया भाषा" के अवतरणों में अंतर

आकार में कोई परिवर्तन नहीं ,  8 वर्ष पहले
19वीं शताब्दी के प्रारंभ से। 1819 ई. में अमरीकी बप्तिस्त पादरियों द्वारा प्रकाशित असमीया गद्य में बाइबिल के अनुवाद से आधुनिक असमीया का काल प्रारंभ होता है। मिशन का केंद्र पूर्वी आसाम में होने के कारण उसकी भाषा में पूर्वी आसाम की बोली को ही आधार माना गया। 1846 ई. में मिशन द्वारा एक मासिक पत्र "अरुणोदय" प्रकाशित किया गया। 1848 में असमीया का प्रथम व्याकरण छपा और 1867 में प्रथम असमीया अंग्रेजी शब्दकोश।
 
== असमियाअसमीया साहित्य ==
{{मुख्य|असमिया साहित्य}}
 
असमियाअसमीया के शिष्ट और लिखित साहित्य का इतिहास पाँच कालों में विभक्त किया जाता है:
 
(१) वैष्णवपूर्वकाल : 1200-1449 ई.,
(5) स्वाधीनतोत्तरकाल : 1947 ई.-।
 
असमियाअसमीया साहित्य की १६वी सदी से १९वीं सदी तक की काव्य धारा को छह भागों में बाँट सकते हैं-
 
* महाकाव्यों व पुराणों के अनुवाद
* धार्मिक कथा काव्य या संग्रह
 
असमियाअसमीया की पारंपरिक कविता उच्चवर्ग तक ही सीमित थी। [[भर्तृदेव]] (१५५८-१६३८) ने असमिया गद्य साहित्य को सुगठित रूप प्रदान किया। [[दामोदर देव]] ने प्रमुख जीवनियाँ लिखीं। [[पुरुषोत्तम ठाकुर]] ने [[व्याकरण]] पर काम किया। अठारहवी शती के तीन दशक तक साहित्य में विशेष परिवर्तन दिखाई नहीं दिए। उसके बाद चालीस वर्षों तक असमिया साहित्य पर [[बांग्ला]] का वर्चस्व बना रहा। असमिया को जीवन प्रदान करने में [[चंद्र कुमार अग्रवाल]] (१८५८-१९३८), [[लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ]] (१८६७-१८३८), व [[हेमचंद्र गोस्वामी]] (१८७२-१९२८) का योगदान रहा। असमियाअसमीया में छायावादी आंदोलन छेड़ने वाली मासिक पत्रिका [[जोनाकी]] का प्रारंभ इन्हीं लोगों ने किया था। उन्नीसवीं शताब्दी के उपन्यासकार [[पद्मनाभ गोहेन बरुआ]] और [[रजनीकंत बार्दोलोई]] ने ऐतिहासिक उपन्यास लिखे। सामाजिक उपन्यास के क्षेत्र में [[देवाचंद्र तालुकदार]] व [[बीना बरुआ]] का नाम प्रमुखता से आता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद [[बिरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य]] को [[मृत्युंजय (उपन्यास)|मृत्यंजय]] उपन्यास के लिए [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] से सम्मानित किया गया। इस भाषा में क्षेत्रीय व जीवनी रूप में भी बहुत से उपन्यास लिखे गए हैं। ४०वे व ५०वें दशक की कविताएँ व गद्य मार्क्सवादी विचारधारा से भी प्रभावित दिखाई देती है।
 
== यह भी देखें ==
35

सम्पादन