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बदलाव

→‎ब्रह्म-द्रव ‘गंगा’ का पराभव!: रोमन लिपि का पाठ हटाया
 
भ्रष्टाचार मुक्त भारत की संकल्पना की ही तर्ज पर ब्रह्म-द्रव गंगा को प्रदूषणमुक्त करने के लिए वर्षों से अकूत संपदा एक्शन प्लान के रूप में बहायी जाती रही है लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। गंगा ही नहीं, सभी नदियों की बदहाली है। लीलापुरुषोत्तम श्रीकृष्ण का कालिया मर्दन प्रसंग ही एकमात्र ऐसा एक्शन प्लान है जो जहरीले नद-जगत् को विष हीन अर्थात् प्रदूषण मुक्त कर सकता है। कालिया नाग प्रदूषण का प्रतीक है, जिसके असंख्य फन नाले, नालियों, सीवर लाइनें, फैक्ट्रियों की विषाक्त गंदगी आदि के प्रतीक हैं। इन फनों को कुचलने का तात्पर्य है विषाक्त स्रोतों को रोक देना। सवाल उठता है कि जब नाले नालियां जाम कर दी जायेंगी तो गंदा पानी घरों में जायेगा, हालात खराब होंगे, ऐसा नहीं है। समस्या जब पैदा होती है तब समाधान भी ढूंढा जाता है। जल शुष्क संयंत्र यानी सोख्ते बनाकर इसका निस्तारण किया जा सकता है।
Ganga ko yadi bachana hai to hame kuchh karya karne padenge.
(1)Ganga per bani sabhi nehro ko band karna parenga.
(2)Ganga me girne vale sabhi nalo ko band karna padenga.
(3)hame desh me kuchh rastriya nalo ka nirman karna padenga. jisme sabhi shehro ka ganda
pani un rastriya nalo ke dwara sidha samudra me dala ja sake.
 
== स्वच्छ गंगा अभियान ==