"लीफ एरिक्सन" के अवतरणों में अंतर

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लीफ़ ने फ़िर ब्यार्नी का जहाज़ खरीदा, ३५ नाविकों का दल इकट्ठा किया, और ब्यार्नी के द्वारा वर्णित भूमी की ओर चले गये। एरिक्सन ने ब्यार्नी का मार्ग उत्त्क्रम मे अनुगमन किया, और एक निर्जन पथरीली जगह पर पहुच गय, जिसका नाम उनहोने [http://en.wikipedia.org/wiki/Helluland हेलुलैंड] रखा। थोड़ी सी यात्रा के पश्चात, वह एक वनाच्छादित इलाके मे पहुच गये, जिसका नाम उनहोने मार्कलैंड (संभवतया [http://en.wikipedia.org/wiki/Labrador लैबराडोर]) रखा। अंततः, लीफ़ विनलैंड (दाखमधु भूमि) पहुच गये। यहा पर उनहोने एक छोटे उपनिवेष की स्थापना की, जिसे ग्रीनलैंड के आगंतुकों ने लीफ़्सबुदिर का नाम दिया। विनलैंड मे सर्दियां बिता कर वे वापस ग्रीनलैंड आ गये।
 
सन् १९६० मे, नोर्वेजियन अन्वेषक [http://en.wikipedia.org/wiki/Helge_Ingstad हेलग इगंस्टाड] के द्वारा किया गया अनुसंधान से न्युफ़ाउन्डलैंड के उत्तरी तट पर एक नोर्वेजियन उपनिवेष का अन्वेषण हुआ। माना गया है कि यह जगह, जिसे आज लौंस ओ मेडो के नाम से जाना जाता है, "वोयजेस टु विनलैंड" और अन्य पुस्तकों मे दिया गया लीफ़्सबुदिर है। इगंस्टाड ने यह दिखाया कि नोर्वेजियन और आईस्लैंडिक् लोग क्रिसटोफ़र कोलमबस से ५०० साल पहले उत्तरी अमेरिका पहुच गये थे। बाद के पुरातात्विक साक्ष्य से पता चलता है कि विनलैंड सेंट लॉरेंस की खाड़ी के आसपास क्षेत्रों मे स्थित था, और लौंस ओ मेडो एक जहाज मरम्मत स्थल और अन्य यात्राओं के लिये विश्राम स्थल था। सागास ओफ़ एरिक द रेड मे दो और स्थानों का उल्लेख किया गया है, अर्थात्, स्ट्रौमफ़्योर्ड, और होप। दोनो ही विनलैंड के दक्षिण स्थित हैं।
 
==सन्दर्भ==
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