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'''लखनऊ ''' भारतीय राज्य [[उत्तर प्रदेश ]] की [[राजधानी]] है ।है।
जिले का मुख्यालय [[लखनऊ ]] है जो राज्य की राजधानी भी है। यह शहर अपनी बहुसांस्कृतिक खूबी , बाग़ों तथा कढाइकढ़ाई के काम से लिये जाना जाता है ।है। इसकी जनसँख्याजनसंख्या [[2001२००१]] में 2,207२०७,340३४० थी तथा [[साक्षरता]] दर 68६८.63६३% है। [[कानपुर]] के बाद यह [[शहर]] उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है।
==भूगोल==
 
 
===नाम की उत्पत्ति===
लखनऊ प्राचीन [[कोसल राज्य]] का हिस्सा था | यह श्री[[राम]] की विरासत थी जिसे उन्होनेउन्होंने अपने भाई [[लक्ष्मण]] को समर्पित कर दिया था ।था। अत: इसे लक्ष्मणपुर या लखनपुर के नाम से जाना गया ।गया। <br>अलग कथाओं के अनुसार इस शहर का नाम, 'लखन अहीर' जो कि 'लखन किले' के मुख्य कलाकार थे, के नाम पर रखा गया था ।था।
 
===लखनऊ का इतिहास===
लखनऊ का इतिहास [[अवध]] के नवाबों द्वारा इस शहर को राजधानी बनाने के साथ शुरुशुरू होता है। [[वास्तुकला]] की दृष्टि से अवध के नवाबों का इस शहर में काफी योगदान है, इसके अलावा इस समय के [[लखनऊ]] की [[मुग़ल]] चित्रकारी भी आज बहुत से [[संग्रहालय]] में सुरक्षित हैं। भवनों के स्तर पर [[बड़ा इमामबाड़ा]], [[छोटा इमामबाड़ा]], तथा [[रूमी दरवाज़ा]] [[मुग़ल वास्तुकला]] का जीता जागता उदाहरण है। हलाकिहालाँकि आधुनिक प्रशासन की उपेक्षा से ये महत्वपूर्णमहत्त्वपूर्ण विरासत खंडहरों में तब्दील होने का खतरा उपस्थित हो गया है।
 
प्राचीन [[अवध]] राज्य का विलय [[ब्रिटिश सम्राज्य]] में [[1857]] के [[सिपाही विद्रोह]] के फलस्वरुप हुआ था। यह शहर भारत के इस पहले व्यवस्थित स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सबसे पहले जीते गये कुछ शहरों में से था। ब्रिटिश शासकों को यह शहर अपने कब्ज़े में लेने के लिये काफी मशक्कत करनी पड़ी। लखनऊ का "शहीद स्मारक" आज भी हमें उन क्रांतिकारियों की याद ताजाताज़ा कराता है।
 
लखनऊ के आधुनिक वास्तुकारी में [[लखनऊ विधानसभा]] और चारबाग़ स्थित [[लखनऊ रेलवे स्टेशन]] का नाम लिया जा सकता है। विश्व के सबसे पुराने आधुनिक स्कूलों में से एक [[ला मार्टीनयर कालेज]] भी इस शहर में मौजूद है जिसकी स्थापना बिर्टिश शासक [[क्लाउड मार्टीन]] की याद में की गयी थी।
{{उक्ति|'''मुस्कुराइये कि आप लखनऊ मे हैं'''<br>-यह पंक्ति लखनऊ मे कई स्थानों पर लिखी मिल जाती है।}}
 
लखनऊ का [[हवाई अड्डा]] शहर से बीस किलोमीटर दूर अमौसी में स्थित है। शहर और आसपास अन्य दिलचस्प स्थानों में कुकरैल (जो एक पिकनिक स्थल है और जहाँ कछुओं का एक [[अभयारण्य]] है); मलीहाबाद (जहाँ के मलीहाबादी आम काफी मशहूर हैं); चिड़ियाघर [[कानपुर]], [[इलाहाबाद]], [[वाराणसी]] और [[मिर्ज़ापुर]] हैं ।हैं। लखनऊ में ही [[राष्ट्रीय औषधि अनुसंधान केन्द्र]], [[किंग जार्ज मेडिकल कालेज]] और [[बीरबल साहनी]] अनुसंधान संस्थान भी हैं।
 
'''चिकन''', यहाँ की [[कशीदाकारी]] का उत्कृष्ट नमूना है और ''लखनवी ज़रदोज़ी'' यहाँ का [[लधु उद्योग]] है जो [[कुर्ता]] और [[साड़ी]] जैसे कपड़ों पर अपनी कलाकारी की छाप चढाते हैं। इस उद्योग का ज्यादतरज़्यादातर हिस्सा पुराने लखनऊ के चौक इलाके में फैला पड़ा है, जहाँ [[बाज़ार]] चिकन कशीदाकारी के दुकानों से भरी पड़ी है। चौक का इलाका न सिर्फसिर्फ़ अपने चिकन के दुकानों की वजह से मशहूर है बल्कि यहाँ मुँह में पानी ला देनेवाले मिठाइयों की दुकाने भी भरी पड़ी हैं, आप मजेमज़े से यहाँ उत्कृष्ट ''मलाई गिलौरी'', ''बादाम हलवा'' और ''रस-मलाई'', और ''चटपटी चाट'' छककर उड़ा सकते हैं।
 
अमीनाबाद, यहाँ [[दिल्ली]] के [[चाँदनी चौक]] की तरह का बाजारबाज़ार है जो शहर के केन्द्र में स्थित है। अन्य प्रमुख बाजारोंबाज़ारों में [[हज़रतगंज]] भी काफी प्रमुख़ है ।है।
 
==शिक्षा==
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