"ईरान का इतिहास" के अवतरणों में अंतर

30 बैट्स् नीकाले गए ,  13 वर्ष पहले
==इस्लाम का उदय और अरब==
{{main|इस्लाम का उदय}}
इसी समय [[अरब]], [[मुहम्मद साहब]] के नेतृत्व में काफी शक्तिशाली हो गए थे ।थे। सन् ६३४ में उन्होने ग़ज़ा के निकट बेजेन्टाइनों को एक निर्णायक युद्ध में हरा दिया ।दिया। फारसी साम्राज्य पर भी उन्होंने आक्रमण किए थे पर वे उतने सफल नहीं रहे थे ।थे। सन् ६४१ में उन्होने हमादान के निकट यज़्देगर्द को हरा दिया जिसके बाद वो पूरब की तरफतरफ़ सहायता याचना के लिए भागा पर उसकी मृत्यु मर्व में सन् ६५१ में उसके ही लोगों द्वारा हुई ।हुई। इसके बाद अरबों का प्रभुत्व बढ़ता गया ।गया। उन्होंने ६५४ में खोरासान पर अधिकार कर लिया और ७०७ िस्वीईस्वी तक बाल्ख ।बाल्ख।
 
===शिया इस्लाम===
{{main| शिया }}
मुहम्मद साहब की मृत्यु के उपरांत उनके वारिस को [[ख़लीफा]] कहा जाता था जो इस्लाम का प्रमुख माना जाता था ।था। चौथे खलीफा अली, मुहम्मद साहब के फरीक थे और उनकी पुत्री फ़ातिमा के पति ।पति। पर उनके खिलाफत को चुनौती दी गई और विद्रोह भी हुए । हुए। सन् ६६१ में अली की हत्या कर दी गई ।गई। इसके बाद उम्मयदों का प्रभुत्व इस्लाम पर हो गया ।गया। सन् ६८० में [[करबला ]] में अली के दूसरे पुत्र हुसैन ने उम्मयदों के खिलाफ़ बगावत की पर उनको एक युद्ध में मार दिया गया ।गया। इसी दिन की याद में शिया मुसलमान महुर्रम मनाते हैं ।हैं। इस समय तक इस्लाम दो खेमे में बट गया था - उम्मयदों का खेमा और अली के खेमा ।खेमा। जो उम्मयदों को इस्लाम के वास्तविक उत्तराधिकारी समझते थे वे सुन्नी कहलाए और जो अली को वास्तविक खलीफा (वारिस) मानते थे वे शिया ।शिया। सन् ७४० में उम्मयदों को तुर्कों से मुँह की खानी पड़ी ।पड़ी। उसी साल एक फारसी परिवर्तित - अबू मुस्लिम - ने उम्मयदों के खिलाफ़ मुहम्मद साहब के वंश के नाम पर उम्मयदों के खिलाफ एक बड़ा जनमानस तैयार किया ।किया। उन्होंने सन् ७४९-५० के बीच उम्मयदों को हरा दिया और एक नया खलीफ़ा घोषित किया - अबुल अब्बास ।अब्बास। अबुल अब्बास अली और हुसैन का वंशज तो नही पर मुहम्मद साहब के एक और फरीक का वंशज था । था। उससे अबु मुस्लिम की बढ़ती लोकप्रियता देखी नहीं गई और उसको ७५५ इस्वी में फाँसी पर लटका दिया ।दिया। इस घटना को शिया इस्लाम में एक महत्वपूर्णमहत्त्वपूर्ण दिन माना जाता है क्योंकि एक बार फिर अली के समर्थकों को हाशिये पर ला खड़ा किया गया था ।था। अबुल अब्बास के वंशजों ने कई सदियों तक राज किया ।किया। उसका वंश [[अब्बासी वंश]] (अब्बासिद) कहलाया और उन्होंने अपनी राजदानीराजधानी [[बगदाद]] में स्थापित की ।की। तेरहवी सदी में [[मंगोल|मंगोलों]] के आक्रमण के बाद बगदाद का पतन हो गया और ईरान में फिर से कुछ सालों के लिए राजनैतिक अराजकता छाई रही ।रही।
 
===सूफीवाद===
{{main|सूफ़ीवाद}}
अब्बासिद काल में ईरान की प्रमुख घटनाओं में से एक थी [[सूफ़ी]] आंदोलन का जन्म ।जन्म। सूफी वे लोग थे जो धार्मिक कट्टरता के शिकार थे और सरल जीवन पसन्द करते थे ।थ। इस आंदोलन ने फ़ारसी भाषा में अभूतपूर्व कवियों को जन्म दिया ।दिया। रुदाकी, [[फिरदौसी]], [[उमर खय्याम]], नासिर-ए-खुसरो, [[रुमी]], [[इराकी]], [[सादी]], हफीज आदि उस काल के प्रसिद्ध कवि हुए। इस काल की फारसी कविता को कई जगहों पर विश्व का सबसे बेहतरीन काव्य कहा गया है ।है। इनमें से कई कवि सूफी विचारदारा से ओतप्रोत थे और अब्बासी शासन के अलावा कइयों को मंगोलों का जुल्म भी सहना या देखना पड़ा था ।था।
 
 
==साफ़वी वंश==
133

सम्पादन