"साहिब बीबी और ग़ुलाम (1962 फ़िल्म)": अवतरणों में अंतर

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भूतनाथ कारख़ाने के शीघ्र छपने वाले विज्ञापन को ठीक कराने के लिए सुबिनय बाबू के पास जाता है लेकिन जबा वहाँ होती है जो भूतनाथ को विज्ञापन पढ़ने को कहती है। उस विज्ञापन में ऐसी चमत्कारी बातें लिखी होती हैं कि यदि पत्नी या प्रेमिका उस सिंदूर को धारण कर अपने पति या प्रेमी के सामने पड़ती है तो पति अथवा प्रेमी उस पर मोहित हो जायेगा। उस रात छोटे बाबू का नौकर बंसी ([[धूमल]]) भूतनाथ के पास आता है और कहता है कि छोटी बहू ([[मीना कुमारी]]) उसे बुला रही है। दोनों छिपकर छोटी बहू के कमरे में जाते हैं और छोटी बहू भूतनाथ को सिंदूर की डिबिया थमाकर कहती है कि इसमें मोहिनी सिंदूर भर के लाये ताकि वह अपने बेवफ़ा पति को अपने वश में कर सके। भूतनाथ छोटी बहू की ख़ूबसूरती और संताप से मंत्रमुग्ध हो जाता है और न चाहते हुये भी उसके राज़ों का भागीदार हो जाता है। भूतनाथ अगले दिन मोहिनी सिंदूर की सच्चाई सुबिनय बाबू से सुनना चाहता है लेकिन सुबिनय बाबू इस बात को टाल जाते हैं। फिर भी वह छोटी बहू के संताप से इतना व्याकुल हो जाता है कि वह उस सिंदूर को छोटी बहू के पास ले जाता है। इसी बीच भूतनाथ का मुँह बोला बहनोई एक स्वतंत्रता सेनानी निकलता है जो बीच बाज़ार अंग्रेज़ पुलिस पर बम का हमला कर देता है और उसके बाद चली गोली-बारी में भूतनाथ की टांग ज़ख़्मी हो जाती है। जबा भूतनाथ का उपचार करती है। चोट ठीक हो जाने के बाद भूतनाथ एक अच्छे वास्तुकार का सहयोगी बन जाता है और कुछ समय के लिए अपने काम में इतना तल्लीन हो जाता है कि वह न ही जबा और न ही छोटी बहू की ख़बर लेता है। भूतनाथ द्वारा छोटी बहू को दिए गए सिंदूर का असर तो नहीं होता है अलबत्ता छोटे बाबू छोटी बहू से कहते हैं कि यदि वह नाचने वालों की तरह उनके साथ शराब पीकर सारी रात रंगरलियाँ मनाये तो वह घर में रुकने को तैयार हैं। छोटी बहू यह चुनौती भी स्वीकार कर लेती है और अपने पति को घर में रखने के लिए शराब पीना और तवायफ़ों के जैसा बर्ताव भी शुरु कर देती है। तरक़ीब कुछ दिनों के लिए तो कामयाब हो जाती है और छोटे बाबू छोटी बहू के ही साथ वक़्त बिताने भी लगते हैं। लेकिन ऐयाशी के शिकार छोटे बाबू एक दिन अपनी प्रिय तवायफ़ के कोठे में पहुँचते हैं तो पाते हैं कि उनका दुश्मन छेनी दत्त उसके रास में डूबा है। छेनी दत्त और उसके साथी छोटे बाबू को लहु-लुहान कर देते हैं और वह अपंग हो जाते हैं। जब कुछ समय बाद भूतनाथ वापस आता है तो पाता है कि छोटी बहू को तो शराब की लत लग गयी है और छोटे बाबू अपंग पड़े हैं। वह जब जबा के पास जाता है तो पता चलता है कि अभी-अभी सुबिनय बाबू का देहान्त हो गया है और जबा म्लेछ न होकर एक सम्भ्रांत परिवार की लड़की है और सुबिनय बाबू जबा को गांव से चुराकर लाये थे लेकिन एक साल की उम्र में ही उसका उसी गांव के अतुल्य चक्रवर्ती (जो कि भूतनाथ स्वयं है) से विवाह कर दिया गया था।<br />
अपने पति को ठीक करने की उम्मीद में छोटी बहू भूतनाथ के साथ किसी सिद्ध पुरुष के आश्रम की ओर निकलती है। मंझले बाबू भूतनाथ और छोटी बहू के बीच हुयी सारी बातें सुन लेते हैं। उनके सफ़र के बीच में ही मंझले बाबू के ग़ुर्गे भूतनाथ को मार-मारकर अधमरा कर देते हैं और छोटी बहू का कहीं भी पता नहीं चलता है।<br />
फ़िल्म फिर वर्तमान में आ जाती है और भूतनाथ के मुलाज़िम उसे बताते हैं कि उनको हवेली के अहाते में एक क़ब्र मिली है। जब भूतनाथ वहाँ जाकर देखता है तो कंकाल के बाज़ू में पहने हुये कड़े से पहचान जाता है कि यह शव छोटी बहू का ही है।फ़िल्महै। फ़िल्म के आख़िर में भूतनाथ बुझे मन से नई इमारत का नक्शा पकड़े हुये बग्घी में बैठता है जिसमें जबा (जो अब उसकी पत्नी है) पहले से बैठी हुयी है और कोचवान बग्घी आगे हाँक ले चलता है।
 
== चरित्र ==
बेनामी उपयोगकर्ता