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==उत्तर भारत पर चढ़ाई==
[[दिल्ली सल्तनत]] पर [[ख़िलज़ी राजवंश]] के पतन के बाद अराजकता की स्थिति बनी हुई थी ।थी। [[तैमूरलंग]] के आक्रमण के बाद सैय्यदों ने स्थिति का फ़ायदा उठाकर दिल्ली की सत्ता पर अधिपत्य कायम कर लिया ।लिया। तैमुर लंग के द्वारा पंजाब का शासक बनाए जाने के बाद खिज्र खान ने इस वंश की स्थापना की थी ।थी। बाद में [[लोदी राजवंश]] के अफ़ग़ानों ने सैय्यदों को हरा कर सत्ता हथिया ली थी ।थी।
===इब्राहिम लोदी===
बाबर को लगता था कि दिल्ली सल्तनत पर फिर से तैमूरवंशियों का शासन होना चाहिए ।चाहिए। एक तैमूरवंशी होने के कारण वो दिल्ली सल्तनत पर कब्जाकब्ज़ा करना चाहता था ।था। उसने सुल्तान [[इब्राहिम लोदी]] को अपनी इच्छा से अवगत कराया (स्पष्टीकरण चाहिए) । इब्राहिम लोदी के जबाब नहीं आने पर उसने छोटे-छोटे आक्रमण करने आरंभ कर दिये ।दिए। सबसे पहले उसने [[कंधार]] पर कब्जाकब्ज़ा किया ।किया। इधर शाह इस्माईल को तुर्कों के हाथों भारी हार का सामना करना पड़ा ।पड़ा। इस युद्ध के बार शाह इस्माईल तथा बाबर, दोनों ने बारूदी हथियारों की सैन्य महत्ता समझते हुए इसका उपयोग अपनी सेना में आरंभ किया ।किया। इसके बाद उसने इब्राहिम लोदी पर आक्रमण किया ।किया। पानीपत में लड़ी गई इस लड़ाई को पानीपत का प्रथम युद्ध के नाम से जानते हैं ।हैं। इसमें बाबर की सेना इब्राहिम लोदी की सेना के सामने बहुत छोटी थी ।थी। पर सेमासेना में संगठन के अभाव में इब्राहिम लोदी यह युद्ध बाबर से हार गया ।गया। इसके बाद दिल्ली की सत्ता पर बाबर का अधिकार हो गया और उसने सन १५२६ में मुगलवंश की नींव डाली ।डाली।
===राजपूत===
[[राणा सांगा]] के नेतृत्व में राजपूत काफी संगठित तथा शक्तिशाली हो चुके थे ।थे। राजपूतों ने एक बड़ा -सा क्षेत्र स्वतंत्र कर लिया था और वे दिल्ली की सत्ता पर काबिजकाबिज़ होना चाहते थे ।थे। इब्राहिम लोदी से लड़ते -लड़ते बाबर की सेना को बहुत क्षति पहुंची थीपहुँची थी। बाबर की सेना राजपूतों की आधी भी नहीं थी ।थी। मार्च १५२७ में खानवा की लड़ाई राजपूतों तथा बाबर की सेना के बीच लड़ी गई ।गई। राजपूतों का जीतना निश्चित लग रहा था ।था। पर युद्ध के दौरान [[तोमर | तोमरों]] ने राणा सांगा का साथ छोड़ दिया और बाबर से जा मिले ।मिले। इसके बाद राणा सांगा को भागना पड़ा और एक आसान -सी लग रही जीत उसके हाथों से निकल गई ।गई। इसके एक साल के बाद किसी मंत्री द्वारा जहरज़हर खिलाने कारण राणा सांगा की मौत हो गई और बाबर का सबसे बड़ा डर उसके माथे से टल गया ।गया। इसके बाद बाबर [[दिल्ली]] की गद्दी का अविवादित अधिकारी बन गया ।गया। आने वाले दिनों में मुगल वंश ने भारत की सत्ता पर ३०० सालों तक राज किया ।किया।
 
बाबर के द्वारा मुगलवंश की नींव रखने के बाद मुगलों ने [[भारत की संस्कृति]] पर अपना अमिट छाप छोड़ी ।छोड़ी।
 
==अन्तिम के दिन==
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