"कर्नल (कम्प्यूटर)": अवतरणों में अंतर

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कम्प्यूटर परिचालन तन्त्र (आपरेटिंग सिस्टम )का
मुख्य भाग है कर्नेल (गुठ्ली)इसके द्वारा हार्ड्वेयर के
स्तर पर की जाने वाली वास्तविक डाटा प्रोसेसिंग
तथा अनुप्रयोग अर्थात अप्लीकेशन के बीच सेतु
का कार्य करता है इसका मुख्य कार्य साफ़्ट्वेयर
तथा हार्डवेयर के बीच संचार स्थापित कर सिस्टम
के सभी स्रोतों का आवश्यकतानुसार प्रयोग करना
जिससे आवश्यक प्रक्रिया का पालन कर कार्य सुचारु
रूप से किया जा सके ।
कर्नेल के द्वारा अनुप्रयोग साफ़्टवेयर द्वारा किये जाने
वाले कार्यों को आवरण प्रदान किया जाता है,
(विशेष रूप से इनपुट आउट्पुट उपकरण को)।
 
विभिन्न आपरेटिंग सिस्टमों मे डिजाइन (अभिकल्प)
तथा आवश्यकातानुसार कार्य सम्पादन विभिन्न
प्रकार के कर्नेल द्वारा किया जाता है। किन्तु मोनोलिथ
कर्नेल (एण्ड्राइड में प्रयुक्त होने वाला)मे आपरेटिंग
सिस्टम कोड एक ही स्थान पर(एड्रेस स्पेस)परकार्य
करते हैं जिससे कम स्थान होने पर भी अधिक कार्य
किया जा पाता है।
कर्नेल का मुख्य कार्य है कि कम्प्यूटर के सभी
स्रोतों का प्रबन्ध करे और प्रोग्रामों को चलाए
और वे प्रोग्राम (अनुप्रयोग आदि )उन स्रोतों
का सही तरह से उपयोग कर पाएं।
 
 
सी.पी यू. मे सभी प्रोग्राम चलते हैं तथा वहीं
से कार्यों का सम्पादन और परिचालन होता
है।यहाँ कर्नेल का कार्य होता हैकि वह तय
करे कि किसी समय विशेष पर चलने वाले
अनेकों प्रोग्रामों में से उस समय विशेष पर कौन
सा प्रोग्राम प्रोसेसर पर चलने दिया जाए
 
 
 
 
मेमोरी प्रबन्ध में भी कर्नेल की प्रमुख
भूमिका है यहाँ इसका काम है कि सुरक्षित रूप से
ही मेमोरी में कोई डाटा पहुँचे ।इसके लिये प्रायः
वर्चुअल एड्रेसिंग प्रणाली का सहारा लिया जाता है
जिसमें वर्चुअल एड्रेसिंग प्रणाली कर्नेल को एक
अतिरिक्त एड्रेस उपलब्ध कराती है ,उस उपलब्ध
कराए गए स्थान पर अनेक अलग अलग प्रक्रियाएं
(प्रोसेस ) सम्पन्न होती हैं। यहाँ पते (एड्रेस) अलग
अलग प्रोग्रामों ले लिए अलग- अलग हो सकते हैं ,
इस प्रक्रिया मेंएक बार मे एक ही प्रोग्राम को चलने
दिया जाता है जिस से अनुप्रयोग क्रैश होने से बचा रहता है ।
अनेक प्रणालियों में इसको वर्चुअल एड्रेस प्रणाली पर
भिन्न -भिन्न सतहों पर वर्तमान डाटा को वर्तमान मेमोरी
के स्थान पर अन्य स्थानों डाटा को स्टोर पर किया जाता
है जैसे -हार्ड ड्राइव ,अन्यथा वह रैम पर जगह घेरता ,
इस प्रकार कर्नेल ऑपरेटिंग सिस्टम को और अधिक
जगह(रैम मेमोरी ) उपलब्ध करा पाता है जो उसकी
उपलब्ध मेमोरी क्षमता से अधिक स्थान होता है
इसके लिए सी. पी. यू. के इशारे पर कर्नेल डिस्क
के खाली स्थान पर उस डाटा को लिख कर छोड़ देता
है और,आवश्यकता होने पर ,वह प्रोग्राम पुनः वहीं
से चल पड़ता है।
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