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यदि हम विद्युत-चालकता पर ध्यान दें, तो ज्ञात होगा कि अधातुओं के विपरीत धातुएँ उत्तम चालक हैं। धातुओं में सबसे श्रेष्ठ विद्युच्चालक [[चाँदी|रजत]] है। यदि तुलना के लिए उसकी चालकता 100 मान ली जाए तो कुछ अन्य साधारण धातुओं की चालकता निम्नलिखित सारणी के अनुसार होगी-
 
{| class="wikitable"
धातु का नाम -- चालकता
|-
 
| धातु --> || रजत || ताम्र || स्वर्ण || ऐल्यूमिनियम || यशद || निकल || लौह || [[वंग]] || सीस (लेड) || पारद
रजत -- 100
|-
 
| चालकता --> || 100 || 95 || 73 || 60 || 27 || 23 || 16 || 14 || 8 || 1.7
ताम्र -- 95
|-
 
|}
स्वर्ण -- 73
 
ऐल्यूमिनियम -- 60
 
यशद -- 27
 
निकल -- 23
 
लौह -- 16
 
[[वंग]] -- 14
 
सीस (लेड) -- 8
 
पारद -- 1.7
 
इस माप पर बौरॉन (अधातु) की चालकता 10<sup>-10</sup> आएगी। इसी प्रकार धातुएँ उत्तम ऊष्मा चालक भी होती हैं। विशेषकर विशुद्ध धातुओं की दोनों चालकताएँ लगभग एक क्रम में रहती हैं। ताप घटाने पर धातुओं का विद्युत्प्रतिरोध घटता है, अथवा हम यह भी कह सकते हैं कि चालकता बढ़ती है।
 
धातुओं के लगभग सभी गुण उनकी परमाणु संख्या के आबर्त फलन (Periodic function) होते हैं। यह आवर्तिता परमाणु आयतन विद्युत्‌ और ऊष्मा चालकता, घातवर्ध्यता, तन्यता, संगलन की [[गुप्त ऊष्मा]] (Latent heat of fusion) आदि में उल्लेखनीय हैं। लादेर मायर ने इसी आवर्तिता की ओर वैज्ञानिकों का ध्यान पहले पहल तत्वों की आवर्तसारणी द्वारा आकर्षित किया था।
 
 
== धातुकर्म ==