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[[हिन्दी साहित्य]] का [[भक्ति काल]] [[१३७५]] वि0 से [[१७००]] वि0 तक माना जाता है। यह काल समग्रतः भक्ति भावना से ओतप्रोत काल है। इस काल को समृद्ध बनाने वाली चारा प्रमुख काव्य-धाराएं हैं ज्ञानाश्रयी, प्रेमाश्रयी, कृष्णाश्रयी ओर रामाश्रयी। इन चार भक्ति शाखाओ के चार प्रमुख कवि हुए जो अपनी-अपनी धारा का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये कवि हैं क्रमश:
 
[[कबीर]]दास [([[१३९९]])-([[१५१८]]])
[[मलिक मोहम्मद जायसी]] [([[१४७७]]-[[१५४२]]])
[[सूरदास]] [([[१४७८]]-[[१५८०]]])
[[तुलसीदास]] [([[१५३२]]-[[१६०२]]])
 
===रीति काल (1600-1900)===
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