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==इतिहास==
[[चित्र:Nv-army-gray BG.jpg|thumb|right|200px300px|लाल कुर्ती संगठन का एक ऐतिहासिक चित्र]]
1937 में नएनये भारत सरकार अधिनियम के अन्तर्गत कराये गए चुनावों में लाल कुर्तियोंकुर्ती वालों के समर्थन से कांग्रेसकाँग्रेस पार्टी को बहुमत मिला और उसने गफ्फार खान के भाई खान साहिबसाहब के नेतृत्व में मन्त्रिमण्डल बनाया, जो बीच मेंका थोड़ा अन्तराल छोडकरछोड़कर 1947 में [[भारत विभाजन]] तक काम करता रहा। इसी वर्ष सीमान्त प्रान्त को [[भारत]] और [[पाकिस्तान]] में से एक में विलय का चुनाव करना पड़ा। उसने जनमत संग्रह के माध्यम से [[पाकिस्तान]] में विलय का विकल्प चुना। <ref>भारत ज्ञानकोश, भाग-5, प्रकाशक: पॉपुलर प्रकाशन मुंबई, पृष्ठ संख्या: 157,आई एस बी एन 81-7154-993-4</ref>
 
==परिणति==
[[ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान]] ने तब [[पाकिस्तान]] और [[अफगानिस्तान]] के सीमान्त जिलों को मिलाकर एक स्वतन्त्र पख्तून देश-पख्तूनिस्तान की अवधारणा की वकालत की। [[पाकिस्तान]] सरकार ने इस आन्दोलन और लाल कुर्ती (पोशाक), दोनों का दमन कर दिया। <ref>भारत ज्ञानकोश, भाग-5, प्रकाशक: पॉपुलर प्रकाशन मुंबई, पृष्ठ संख्या: 157,आई एस बी एन 81-7154-993-4</ref>
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