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सन् १९४७ में जब हिन्दुस्तान आजाद हुआ तब यहाँ ५६५ रियासतें थीं। इनमें से अधिकांश रियासतों ने ब्रिटिश सरकार से लोकसेवा प्रदान करने एवं कर (टैक्स) वसूलने का [[ठेका या ठीका|'ठेका']] ले लिया था। कुल ५६५ में से केवल २१ रियासतों में ही [[सरकार]] थी और केवल ३ रियासतें ([[मैसूर]], [[हैदराबाद]] तथा [[कश्मीर]]) ही क्षेत्रफल में बड़ी थीं। सन् १९४७ में ब्रितानियों से मुक्ति मिलने पर इन्हें [[भारत]] या हिन्दुस्तान के विभाजन के बाद बने [[पाकिस्तान]] में मिला लिया गया।
 
15 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश सार्वभौम सत्ता का अन्त हो जाने पर केन्द्रीय गृह मन्त्री [[सरदार वल्लभभाई पटेल]] के नीति कौशल के कारण हैदराबाद, कश्मीर तथा जूनागढ़ के अतिरिक्त सभी रियासतें शान्तिपूर्वक भारतीय संघ में मिल गयीं। 26 अक्टूबर को कश्मीर पर पाकिस्तान का आक्रमण हो जाने पर वहाँ के महाराजा हरी सिंह ने उसे भारतीय संघ में मिला दिया। पाकिस्तान में सम्मिलित होने की घोषणा से [[जूनागढ़]] में विद्रोह हो गया जिसके कारण प्रजा के आवेदन पर राष्ट्रहित में उसे भारत में मिला लिया गया। वहाँ का नवाब [[पाकिस्तान]] भाग गया। 1948 में सैनिक कार्रवाई द्वारा हैदराबाद को भी भारत में मिला लिया गया। इस प्रकार हिन्दुस्तान से देशी रियासतों का अन्त हुआ।
 
== परिचय तथा इतिहास ==
1919 के अधिनियमानुसार 1921 में नरेशमंडल बना जिसमें रियासतों के शासकों को अपने सामान्य हितों पर वार्तालाप करने तथा ब्रिटिश सरकार को परामर्श देने का अधिकार मिला। 1926 में लार्ड रेडिंग ने ब्रिटिश सार्वभौम सत्ता पर बल देते हुए देशी शासकों को ब्रिटिश सरकार के प्रति उत्तरदायी घोषित किया जिससे वे अप्रसन्न हुए। इसलिए 1929 में बटलर कमेटी रिपोर्ट में सार्वभौम सत्ता की सीमाएँ निश्चित कर दी गई। 1930 में नरेशमंडल के प्रतिनिधि गोलमेज सम्मलेन में सम्मिलित हुए। 1935 के संवैधानिक अधिनियम में रियासतों को भारतीय संघ में सम्मिलित करने की अनुचित व्यवस्था रखी गई। पर वह कार्यान्वित न हो सकी। रियासतों में निरंकुश शासन चलता रहा। केवल मैसूर, ट्रावनकोर, बड़ौदा, जयपुर आदि कुछ रियासतों में प्रजा परिषदों के आंदोलन के परिणामस्वरूप कुछ प्रातिनिधिक शासन संस्थाएँ बनीं। पर अधिकांश रियासतें प्रगतिहीन एवं अविकसित स्थिति में रहीं। द्वितीय विश्व युद्ध में रियासतों ने इंग्लैंड को यथाशक्ति सहायता दी।
 
15 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश सार्वभौम सत्ता का अंतअन्त हो जाने पर केन्द्रीय गृह मन्त्री [[सरदार वल्लभभाई पटेल]] के नीतिकौशलनीति कौशल के कारण हैदराबाद, कश्मीर तथा जूनागढ़ के अतिरिक्त सभी रियासतें शांतिपूर्वकशान्तिपूर्वक भारतीय संघ में मिल गई।गयीं। 26 अक्टूबर को कश्मीर पर पाकिस्तान का आक्रमण हो जाने पर वहाँ के महाराजमहाराजा हरी सिंह ने उसे भारतीय संघ में मिला दिया। पाकिस्तान में सम्मिलित होने की घोषणा से [[जूनागढ़]] में विद्रोह हो गया जिसके कारण प्रजा के आवेदन पर राष्ट्रहित में उसे भारत में मिला लिया गया। वहाँ का नवाब [[पाकिस्तान]] भाग गया। 1948 में पुलिस काररवाईकार्रवाई द्वारा हैदराबाद भी भारत में मिल गया। इस प्रकार रियासतों का अंतअन्त हुआ।हुआ वहाँऔर परपूरे लोकतंत्रात्मकदेश सासनमें लोकतन्त्रात्मक शासन चालू हुआ। उनकेइसके एवज़ में रियासतों के शासकों व नवाबों को [[भारत सरकार]] की ओर से उनकी क्षतिपूर्ति हेतु निजी कोष (प्रिवी पर्स]] दिया गया।
 
== इन्हें भी देखें ==
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