"रैंकोजी मन्दिर" के अवतरणों में अंतर

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==मन्दिर परिसर में नेताजी की प्रतिमा==
जब अन्त्येष्टि के एक माह पश्चात् सुभाषचन्द्र बोस का अस्थिकलश ताईहोकू से जापान लाया गया तो मन्दिर के प्रमुख पुजारी मोचीज़ुकी ने उसे मन्दिर में एक सुरक्षा कवच (सेफ कस्टडी) की तरह सुरक्षित रखने की आज्ञा प्रदान की थी। तभी से उनका अस्थि कलश यहाँ रखा हुआ है।<ref >{{cite web | url = http://www.japantimes.co.jp/life/2011/08/14/general/japans-unsung-role-in-indias-struggle-for-independence/#.UnztWXzrbUt |title= | language= अंग्रेजी | quote= The official version released by the Japanese authorities — and still endorsed by the Indian government — details Bose boarding a Japanese bomber at Taihoku Airport along with several trunks of gold to finance his next government in exile. Shortly after take-off, it states, the aircraft developed engine problems and crashed. Bose suffered serious burns and died that evening. After a cremation in Taiwan, his ashes were flown to Tokyo where they have remained since being interred on Sept. 18, 1945, at Renkoji Temple. | title = जापान टाइम्स | publisher=जापान टाइम्स | date=14अगस्त 2011 | work=JON MITCHELL | accessdate=8 अक्तूबर 2013}}</ref> नेताजी के संगी-साथी व उनके प्रति अपनी निष्ठा रखने वाले लोग प्रति वर्ष उनकी पुण्य तिथि पर एकत्र होकर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। फिलहाल नेताजी की अस्थियाँ मन्दिर परिसर स्थित एक स्वर्णिम पैगोडा में रखी गयी हैं। उसी के बाहर नेताजी की एक छोटी सी प्रतिमा भी लगा दी गयी है जिससे कि आगंतुकों का ध्यान इस ओर दिलाया जा सके कि यहाँ नेताजी की अस्थियाँ अभी भी सुरक्षित रखी हुई हैं।
 
==अस्थियों पर विवाद ==